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कर्नाटक: कैबिनेट में खाली सीट के लिए लॉबिंग जारी, राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे सीएम शिवकुमार


बेंगलुरु/नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक की कैबिनेट में एक पद अभी भी खाली है, जिसे लेकर सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के भीतर जबरदस्त लॉबिंग तेज हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जाति, क्षेत्र, समुदाय और लिंग के आधार पर प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं।

बेंगलुरु/नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक की कैबिनेट में एक पद अभी भी खाली है, जिसे लेकर सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के भीतर जबरदस्त लॉबिंग तेज हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जाति, क्षेत्र, समुदाय और लिंग के आधार पर प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार गुरुवार को दिल्ली पहुंचे हैं, और उम्मीद है कि वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी से कैबिनेट के गठन पर चर्चा कर सकते हैं। इसमें खाली पद और योजना एवं आदिवासी कल्याण में कथित अनियमितताओं के मामले को लेकर सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे को लेकर भी बातचीत हो सकती है।

सीएम शिवकुमार ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से दोपहर में मिलने का समय मांगा है। चर्चा में एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला के भी शामिल होने की उम्मीद है।

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया जिन प्रमुख नामों का समर्थन कर रहे हैं, उनमें वरिष्ठ विधायक बसवराज शिवन्नवर का नाम भी शामिल है। शिवन्नवर वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं; उन्हें प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाए रखने के प्रयासों के तहत कैबिनेट में जगह देने पर विचार किया जा रहा है।

बेंगलुरु से चार बार विधायक रहे एम. कृष्णप्पा के नाम पर भी चर्चा हो रही है, जबकि माना जा रहा है कि शिवकुमार कई अन्य नामों पर भी विचार कर रहे हैं। सरकार पर किसी महिला नेता को प्रतिनिधित्व देने का भी दबाव है। मौजूदा चर्चाओं में जिन नामों पर विचार किया जा रहा है, उनमें विधायक अन्नपूर्णा तुकाराम और विधायक काम्पली गणेश शामिल हैं।

अगर नागेंद्र इस्तीफा देते हैं तो अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय को प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो सकता है। भाजपा और जेडी(एस) उनके इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उन पर आदिवासी कल्याण मामले में शामिल होने का आरोप लगा रहे हैं। नागेंद्र का कहना है कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और उन्होंने पार्टी आलाकमान के निर्देश पर पद छोड़ने की इच्छा भी जताई है।

कांग्रेस ने पहले मंत्रियों की सूची में वरिष्ठ नेता और एमएलसी गायत्री शांतेगौड़ा के नाम की घोषणा की थी, लेकिन बाद में उन्हें शपथ ग्रहण समारोह के लिए नहीं बुलाया गया। उन्हें शामिल न किए जाने से कैबिनेट के अंतिम गठन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि सिद्दारमैया इस बात से नाखुश हैं कि वोक्कालिगा और लिंगायत नेताओं को जरूरत से ज्यादा और अल्पसंख्यकों को अपर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है।

माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने बसवराज शिवन्नवर को शामिल करने के लिए पार्टी आलाकमान के सामने अपनी पसंद जाहिर की है। कैबिनेट के गठन को अंतिम रूप देने के लिए शिवकुमार को अतिरिक्त समय दिए जाने के बावजूद, संतुलन और प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल बने हुए हैं। इस बीच, कुछ मंत्रियों के इस्तीफे की संभावना पर भी चर्चा चल रही है, जिससे कई सीनियर कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि उन्हें कैबिनेट में शामिल होने का मौका मिल सकता है।

सूत्रों का कहना है कि नागेंद्र अपने साथ आदिवासी कल्याण मामले से जुड़ी फाइलें और दस्तावेज लाए हैं। माना जा रहा है कि वह भाजपा विधायक गली जनार्दन रेड्डी और पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु से जुड़े मामलों की जानकारी भी साथ लाए हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, अगर पार्टी हाईकमान निर्देश दे तो नागेंद्र इस्तीफा दे सकते हैं।

--आईएएनएस

एसडी/डीकेपी

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