न्यूयॉर्क, 22 सितंबर (आईएएनएस)। भारत समेत सात देशों और यूरोपीय संघ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म’ (पी4एम) पहल शुरू की है। संयुक्त घोषणा पत्र जारी में अहम बिंदुओं का उल्लेख किया गया।
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न्यूयॉर्क, 22 सितंबर (आईएएनएस)। भारत समेत सात देशों और यूरोपीय संघ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म’ (पी4एम) पहल शुरू की है। संयुक्त घोषणा पत्र जारी में अहम बिंदुओं का उल्लेख किया गया।
न्यूयॉर्क में आयोजित पहले पी4एम शिखर सम्मेलन में भारत ने बहुपक्षवाद को मजबूत करने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की।
पी4एम के शुरुआती सह-प्रायोजकों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, केन्या और यूरोपीय संघ शामिल हैं। यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्चस्तरीय सप्ताह से इतर आयोजित किया गया। पहल का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों और महाद्वीपों के देशों को एक मंच पर लाकर बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करना, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान सुनिश्चित करना तथा शांति और समावेशी समृद्धि को बढ़ावा देना है।
सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त घोषणा में कहा गया कि दुनिया इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। बढ़ते ध्रुवीकरण, संघर्षों के विस्तार, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन, संरक्षणवाद, दबाव की राजनीति और बल प्रयोग की धमकियों पर चिंता जताई गई। घोषणा में कहा गया कि ये रुझान अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए चुनौती हैं तथा ऐसे समय में वैश्विक सहयोग की जरूरत बढ़ गई है।
घोषणा में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था अब भी आवश्यक है, लेकिन इसे आज की अधिक जटिल, परस्पर जुड़ी और बहुध्रुवीय दुनिया के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। इसमें बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और समावेशी बनाने के लिए सुधारों की जरूरत पर जोर दिया गया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था दबाव में है और ऐसे समय में बहुपक्षवाद को अपनी भूमिका और मजबूत करनी होगी। उन्होंने अधिक सहभागी विचार-विमर्श और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया की आवश्यकता बताई। जयशंकर ने वैश्विक स्तर पर ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों और उनसे जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए नए ढांचे और सुरक्षा उपायों की जरूरत पर भी जोर दिया। इसके अलावा आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की आवश्यकता बताई, ताकि किसी एक महत्वपूर्ण मार्ग या क्षेत्र में व्यवधान का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर न पड़े।
पी4एम घोषणा में अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। इसमें बल प्रयोग या बल प्रयोग की धमकी पर रोक तथा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकारों के सम्मान की बात भी कही गई है।
घोषणा में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी, प्रदूषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल बदलाव, वैश्विक स्वास्थ्य और विकास वित्त जैसे मुद्दों पर भी व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बताई गई। साथ ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक विविध और मजबूत बनाने तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
पी4एम पहल में संयुक्त राष्ट्र के सुधार को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया गया है। सह-प्रायोजक देशों ने संयुक्त राष्ट्र समेत बहुपक्षीय संस्थाओं को मजबूत करने और उन्हें मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अधिक सक्षम बनाने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। घोषणा में यूएन80 जैसी पहलों के जरिए संयुक्त राष्ट्र में सुधार का समर्थन किया गया।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने सम्मेलन के बाद कहा कि विभिन्न महाद्वीपों और अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले देशों के बीच यह साझा समझ है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का समाधान कोई एक देश अकेले नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पी4एम पहल साझा सिद्धांतों को ठोस कार्रवाई में बदलने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगी।
पी4एम के सह-प्रायोजकों ने इस पहल को सभी क्षेत्रों के अन्य देशों के लिए भी खुला रखने की बात कही है। वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय के लिए एक तंत्र बनाने और सहयोग के प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करने पर भी सहमति बनी है।
भारत की ओर से इस पहल में भागीदारी ऐसे समय हुई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार, वैश्विक शांति, आर्थिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े मुद्दे प्रमुख चर्चा में हैं। पी4एम घोषणा में इन चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग, अंतरराष्ट्रीय कानून और साझा जिम्मेदारी को आधार बनाने की बात कही गई है।
--आईएएनएस
केआर/
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