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भारत तेल पर निर्भरता कम करने के लिए सौर, पवन और हाइड्रोजन को दे रहा बढ़ावा: पूर्व बीपीसीएल चेयरमैन


नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। भारत सरकार की ओर से एथेनॉल मिश्रण और रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने से देश की कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। यह बयान भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) कृष्णकुमार गोपालन ने सोमवार को दिया।

नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। भारत सरकार की ओर से एथेनॉल मिश्रण और रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने से देश की कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। यह बयान भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) कृष्णकुमार गोपालन ने सोमवार को दिया।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए गोपालन ने कहा कि सरकार ने एनर्जी ट्रांजिशन की जरूरत को बहुत पहले समझ लिया था और कच्चे तेल की आयात से जुड़ी चिंताओं को कम करने के लिए तेल कंपनियों के साथ लगातार काम कर रही है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जो देश की अर्थव्यवस्था को कच्चे तेल में आने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाता है।

गोपालन के मुताबिक, सरकार ने इस चुनौती को समझते हुए पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण शुरू किया था।

उन्होंने आईएएनएस से कहा,"यह हमारी निर्भरता कम करने की दिशा में उठाया गया पहला कदम है। दूसरा कदम यह है कि हमने रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स को बढ़ाने के प्रयास किए हैं, चाहे वह सौर ऊर्जा हो, पवन ऊर्जा हो या हाइड्रोजन। हम हाइड्रोजन रिटेल आउटलेट्स पर भी विचार कर रहे हैं।”

गोपालन ने वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद ईंधन आपूर्ति के कुशल प्रबंधन में तेल विपणन कंपनियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने आगे कहा, “वे आपूर्ति का बहुत अच्छे से प्रबंधन कर रहे हैं। स्थानीय संकटों को छोड़कर शायद ही कभी ईंधन की कमी हुई हो और मुझे लगता है कि तेल कंपनियों ने आपूर्ति प्रबंधन में सराहनीय काम किया है।”

ईंधन की कीमतों पर, बीपीसीएल के पूर्व प्रमुख ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद तेल कंपनियों ने लागत का एक बड़ा हिस्सा वहन किया है।

उनके अनुसार, पेट्रोल पर वर्तमान अंडर-रिकवरी लगभग 13 से 14 रुपए प्रति लीटर है, जबकि डीजल पर अंडर-रिकवरी लगभग 38 रुपए प्रति लीटर है।

उन्होंने आईएएनएस से कहा,“अच्छी बात यह है कि कच्चे तेल की कीमतें गिरने लगी हैं, बातचीत के सफल होने के सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं और अगर ऐसा होता है, तो यह बहुत बड़ी राहत होगी, ज्यादा बढ़ोतरी की जरूरत नहीं पड़ेगी जिससे नुकसान की भरपाई हो सके और कच्चे तेल की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।”

--आईएएनएस

एबीएस/

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