काठमांडू, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल वीरेश प्रताप सिंह कौशिक ने रविवार को नेपाल की यात्रा शुरू की। इसका उद्देश्य भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों से बातचीत करना और देश में पूर्व सैनिकों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करना है।
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काठमांडू, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल वीरेश प्रताप सिंह कौशिक ने रविवार को नेपाल की यात्रा शुरू की। इसका उद्देश्य भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों से बातचीत करना और देश में पूर्व सैनिकों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करना है।
नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि पीवीएसएम, यूवाईएसएम, वाईएसएम और एसएम जैसे सैन्य सम्मानों से सम्मानित लेफ्टिनेंट जनरल कौशिक अपनी यात्रा के दौरान पूर्व भारतीय सैनिकों से मुलाकात करेंगे और नेपाल में उनके लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे।
भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल भी रहे कौशिक नेपाल में रह रहे सेवानिवृत्त भारतीय सैनिकों के कल्याण की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे हैं। वह उनके लिए उपलब्ध पेंशन, लाभ और सहायता योजनाओं की भी समीक्षा करेंगे।
भारतीय दूतावास की वेबसाइट के अनुसार, वर्तमान में नेपाल में भारतीय सेना के 1.22 लाख से अधिक पेंशनभोगी रहते हैं। भारतीय सरकार इन पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और आश्रितों के कल्याण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। रक्षा विंग की विभिन्न शाखाएं समन्वय के साथ नेपाल में रहने वाले गोरखा पूर्व सैनिकों की जरूरतों और अपेक्षाओं को पूरा करने का काम कर रही हैं।
यह यात्रा नेपाल में रह रहे भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सैनिकों, विशेष रूप से गोरखा पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ये सभी भारतीय सरकार से पेंशन और अन्य सहायता प्राप्त करते हैं।
9 नवंबर 1947 को भारत, नेपाल और यूनाइटेड किंगडम की सरकारों के प्रतिनिधियों के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के तहत भारत की स्वतंत्रता के बाद भी नेपाली नागरिकों की भारतीय और ब्रिटिश सेनाओं में भर्ती की परंपरा जारी रही।
2019 से भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती रुकी हुई है। शुरुआत में यह कोविड-19 महामारी के कारण बंद हुई थी, लेकिन 2022 में भारत द्वारा अग्निवीर योजना लागू किए जाने के बाद नेपाल ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर रोक लगा दी। नेपाल सरकार का तर्क है कि अग्निवीर योजना 1947 के भारत-नेपाल-ब्रिटेन त्रिपक्षीय समझौते की शर्तों के अनुरूप नहीं है।
योजना के तहत अग्निवीरों के रूप में भर्ती किए गए जवानों में से केवल एक-चौथाई को चार वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद नियमित सैन्य सेवा में रखा जाता है। यह स्पष्ट नहीं है कि कौशिक अपनी यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर पूर्व सैनिकों या नेपाली अधिकारियों से चर्चा करेंगे या नहीं।
अगस्त में भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने नेपाली सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल के आधिकारिक निमंत्रण पर नेपाल का दौरा किया था। इस दौरान 17 अगस्त को नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने जनरल सेठ को नेपाली सेना के मानद जनरल की उपाधि प्रदान की थी।
नेपाल और भारत के बीच 1950 से एक परंपरा चली आ रही है, जिसके तहत दोनों देशों के सेना प्रमुखों को एक-दूसरे की सेना में मानद जनरल का दर्जा दिया जाता है। यह परंपरा दोनों देशों के घनिष्ठ सैन्य संबंधों का प्रतीक मानी जाती है।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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