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बीएलए के ऑपरेशन हेरोफ के बाद पाकिस्तानी पुलिस पर 27 बलूचों को गायब करने का आरोप

क्वेटा, 1 मार्च (आईएएनएस)। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के ऑपरेशन हेरोफ के दौरान नुकसान उठाने के बाद बलूचिस्तान और सिंध में पाकिस्तानी पुलिस ने कराची, क्वेटा और दूसरी जगहों पर 27 लोगों को जबरदस्ती गायब कर दिया और बाद में उन्हें हथियारबंद उग्रवादी बताया।

क्वेटा, 1 मार्च (आईएएनएस)। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के ऑपरेशन हेरोफ के दौरान नुकसान उठाने के बाद बलूचिस्तान और सिंध में पाकिस्तानी पुलिस ने कराची, क्वेटा और दूसरी जगहों पर 27 लोगों को जबरदस्ती गायब कर दिया और बाद में उन्हें हथियारबंद उग्रवादी बताया।

बलूच युवाओं को पिछले 20 वर्षों से बलूचिस्तान में एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल हत्याओं का सामना करना पड़ रहा है और अब पाकिस्तान उनके परिवारों को भी सामूहिक सजा के रूप में निशाना बना रहा है।

द बलूचिस्तान पोस्ट की एक र‍िपोर्ट के मुताबिक, हमदान बलूच सिंध पुलिस की हिरासत में था और उसे दो बार सिंध हाईकोर्ट में पेश किया गया था। इसके बावजूद अधिकारियों ने दावा किया कि वह एक मुठभेड़ में मारा गया, जबकि उसके परिवार को चुप कराने के लिए लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

र‍िपोर्ट में कहा गया है, "जब भी बलूचिस्तान में आजादी के लिए लड़ रहे हथियारबंद ग्रुप पाकिस्तानी मिलिट्री को नुकसान पहुंचाते हैं, तो पाकिस्तान की सिक्योरिटी संस्थाएं पहले से जबरदस्ती गायब किए गए लोगों को एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल हालात में मारकर देती हैं और फिर दावा करती हैं कि वे हथियारबंद एनकाउंटर में मारे गए थे।"

इसमें आगे कहा गया, “ऑपरेशन हेरोफ के दौरान बलूच लिबरेशन आर्मी को हुए नुकसान के बाद, बलूचिस्तान और सिंध पुलिस ने कराची, बरखान, पंजगुर और क्वेटा में 27 जबरन लापता व्यक्तियों को मार डाला और बाद में उन्हें सशस्त्र उग्रवादी बताया। हालांकि, उनमें से एक, हमदान बलूच, को पहले ही सिंध हाईकोर्ट में पेश किया जा चुका था और जिस दिन वह मारा गया, उसी दिन उसकी अदालत में पेशी निर्धारित थी।”

कई वर्षों से पाकिस्तान की सेना और शक्तिशाली राज्य संस्थान व्यवस्थित रूप से बलूच लोगों को मारते रहे हैं। फरवरी में 27 जबरन लापता व्यक्तियों की हत्या बलूचिस्तान में इस तरह की पहली घटना नहीं है, बल्कि कथित मुठभेड़ों में जबरन लापता व्यक्तियों को मारने का यह सिलसिला पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से जारी है। हालांकि, मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध और राज्य के दबाव के कारण ऐसे मामलों की केवल सीमित संख्या ही रिपोर्ट की जाती है।

र‍िपोर्ट में कहा गया है, “पाकिस्तान की शक्तिशाली संस्थाएं शायद यह मानती हैं कि जबरन गुमशुदगी, राज्य दमन, सामूहिक दंड और हिरासत में हत्याएं बलूच विद्रोह को दबा सकती हैं, लेकिन बलूचिस्तान की जमीनी हकीकत बताती है कि ऐसी नीतियां बलूचिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंधों को और कमजोर कर रही हैं। हमदान बलूच की मां का दुख, और राज्य दमन से प्रभावित अन्य माताओं का सामूहिक शोक, क्षेत्र में राज्य की वैधता को लगातार कमजोर कर रहा है।”

शुक्रवार को, ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) ने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और गैर-राज्य तत्वों की ओर से की जा रही हिंसा में खतरनाक बढ़ोतरी पर गहरी चिंता जताई।

अधिकार संस्था ने बताया कि 25 फरवरी को अज्ञात हथियारबंद लोगों ने केच जिले के मिनाज इलाके में एक क्रूर हमला किया, जिसमें छह लोग मारे गए और महिलाओं और बच्चों सहित तीन अन्य घायल हो गए।

एचआरसीबी के अनुसार, हमलावरों ने कथित तौर पर एक घर पर मोर्टार के गोले दागे और फिर अंदर मौजूद लोगों पर भारी गोलीबारी की। हमलावरों ने घर के बाहर खड़ी तीन गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया।

एचआरसीबी ने कहा, “निर्दोष नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की हत्या, मौलिक मानवाधिकारों और मानवीय सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है। कोई भी राजनीतिक उद्देश्य या सुरक्षा का तर्क ऐसे कृत्यों को वैध नहीं ठहरा सकता।”

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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