
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि महंगाई भत्ते के मामले में राज्य सेवारत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महंगाई दोनों वर्गों को समान रूप से प्रभावित करती है, इसलिए भत्तों में समानता जरूरी है।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने केरल सरकार और केरल राज्य सड़क परिवहन निगम की अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि समानता एक गतिशील अवधारणा है और इसे सीमित दायरे में नहीं बांधा जा सकता।
पीठ ने अपने फैसले में अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए कहा कि समानता का अधिकार मनमानी के खिलाफ है और कानून के शासन की बुनियाद है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्गीकरण तभी वैध है जब वह तार्किक आधार पर हो और उसका उद्देश्य से सीधा संबंध हो।
अन्य मामलों में भी सुप्रीम कोर्ट सख्त:
कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में शालीनता और मर्यादा बनाए रखना अनिवार्य है और किसी भी याचिका में अशोभनीय भाषा स्वीकार नहीं की जाएगी।
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