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बिहार: सीमावर्ती क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने तथा संदिग्ध वित्तीय और व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का निर्देश


पटना, 18 जून (आईएएनएस)। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने गुरुवार को भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा, प्रशासनिक और आर्थिक विषयों पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में ‘नो-मैन्स लैंड’ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने, गायब सीमा स्तंभों (पिलर) के पुनर्स्थापन, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की चौकियों को सुदृढ़ करने तथा सीमावर्ती जिलों में संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की जांच की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

पटना, 18 जून (आईएएनएस)। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने गुरुवार को भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा, प्रशासनिक और आर्थिक विषयों पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में ‘नो-मैन्स लैंड’ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने, गायब सीमा स्तंभों (पिलर) के पुनर्स्थापन, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की चौकियों को सुदृढ़ करने तथा सीमावर्ती जिलों में संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की जांच की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार, बिहार राज्य में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 735 किलोमीटर है। इस सीमा पर बिहार के 7 जिले हैं। सीमा की सुरक्षा के लिए बिहार पुलिस के 70 पुलिस थाने तथा सीमा सशस्त्र बल (एसएसबी) की 194 सीमा चौकियां तैनात हैं।

बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के 0-15 किलोमीटर क्षेत्र और नो-मेन्स लैंड में सभी अतिक्रमणों को तत्काल हटाया जाए तथा भविष्य में किसी भी नए अतिक्रमण को पनपने न दिया जाए। मुख्य सचिव को बैठक में बताया गया कि राज्य में ‘नो-मैन्स लैंड’ क्षेत्र में कुल 1,359 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे, जिनमें से 1,349 को हटाया जा चुका है, जबकि शेष 10 अतिक्रमणों को भी शीघ्र हटाने का निर्देश दिया गया है।

सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण की समीक्षा के दौरान बताया गया कि कुल 996 चिन्हित अतिक्रमण मामलों में से अब तक 879 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि 117 अतिक्रमण फिलहाल शेष हैं। बैठक में भारत-नेपाल सीमा पर कुल 5343 पिलर अवस्थित हैं। 18 मई की स्थिति के अनुसार, इनमें से 3771 पिलर अच्छी स्थिति में हैं, 317 क्षतिग्रस्त हैं, जबकि 1155 लापता श्रेणी में हैं तथा 100 पिलरों का निर्माण किया जाना अभी शेष है।

बैठक में कहा गया कि सुपौल, अररिया, मधुबनी, किशनगंज, सीतामढ़ी, पश्चिम चम्पारण और पूर्वी चम्पारण जिलों में एसएसबी एवं जिला प्रशासन द्वारा तैयार सूचियों के आधार पर सैकड़ों प्रतिष्ठानों की जांच की गई। जांच के दौरान सीतामढ़ी में जिला प्रशासन की सूची के 159 में से 28 संस्थान संदिग्ध पाए गए।

किशनगंज में 21, पश्चिम चम्पारण में 9, मधुबनी व सुपौल में छह-छह और अररिया और पूर्वी चम्पारण में पांच-पांच प्रतिष्ठान संदिग्ध पाए गए हैं, जिन पर अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है। बयान में कहा गया कि वित्त विभाग और निबंधन कार्यालयों द्वारा 10 लाख रुपए या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति के निबंधन के लिए पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है। पांच लाख रुपए से अधिक के नकद लेनदेन की सूचना प्रत्येक माह आयकर विभाग को भेजी जा रही है।

साइबर फ्रॉड और वित्तीय हेराफेरी के लिए इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध म्यूल खातों के खिलाफ सीमावर्ती जिलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है। बेतिया में 78 खाते फ्रीज किए गए तथा पांच प्राथमिकी दर्ज की गईं। बगहा में आर्थिक अपराध इकाई द्वारा चिन्हित 18 म्यूल खातों के सत्यापन के क्रम में चार मामले दर्ज कर 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, अन्य सीमावर्ती जिलों में भी कुल 33 मामले दर्ज कर 148 खातों को फ्रीज किया गया है। अपराधियों द्वारा भारतीय नागरिकों को ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश पर भारी मुनाफे और नौकरी का झांसा देकर ठगी की जा रही थी।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी

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