चेन्नई, 12 सितंबर (आईएएनएस)। ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने शहर भर में कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग-अलग करना अनिवार्य कर दिया है। इसका मकसद कचरा प्रबंधन को मजबूत करना और लैंडफिल तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा को कम करना है।
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चेन्नई, 12 सितंबर (आईएएनएस)। ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने शहर भर में कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग-अलग करना अनिवार्य कर दिया है। इसका मकसद कचरा प्रबंधन को मजबूत करना और लैंडफिल तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा को कम करना है।
यह नियम सभी पर लागू होगा, जिसमें निजी घर, अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स, दुकानें, कमर्शियल संस्थान, स्कूल-कॉलेज, सरकारी दफ्तर और बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले संस्थान शामिल हैं। निगम ने चेतावनी दी है कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 का पालन न करने पर जुर्माना और नगरपालिका कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
निवासियों और संस्थानों को कचरा कलेक्शन के लिए आने वाले सफाई कर्मचारियों को सौंपने से पहले उसे चार कैटेगरी में बांटना होगा।
गीला कचरा के लिए हरा डिब्बा, कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच और अन्य रिसाइकिल होने वाला सूखा कचरा के लिए नीला डिब्बा का इस्तेमाल करना होगा।
लाल डिब्बा में सैनिटरी कचरा, जिसमें इस्तेमाल किए हुए डायपर और सैनिटरी नैपकिन शामिल हैं, इसे सुरक्षित तरीके से लपेटकर डालना होगा।
घरेलू खतरनाक कचरा, जैसे बैटरी, बिजली के बल्ब, इलेक्ट्रॉनिक कचरा, एक्सपायर्ड दवाएं और केमिकल के लिए काला डिब्बा का इस्तेमाल करना होगा।
अलग किए गए कचरे को ले जाने के दौरान डोर-टू-डोर कलेक्शन में इस्तेमाल होने वाले बैटरी वाले वाहनों में भी चार रंगों के कंटेनर लगाए गए हैं। सभी 200 वार्डों के सफाई कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे केवल वही कचरा लें जो स्रोत पर सही तरीके से अलग किया गया हो।
यह आदेश दक्षिणी चेन्नई में शुरू की गई एक बड़ी जागरूकता पहल के बाद आया है। 22 अगस्त को जीसीसी ने 40 दिन का 'सेग्रिगेट वेस्ट - सेव टुमॉरो' अभियान शुरू किया था, जिसमें घर-घर जाकर लोगों को कचरे को अलग करने के महत्व के बारे में बताया गया। शुरुआती चरण में पांच जोन के हर जोन में 1,000 घरों को कवर किया गया। इसमें शामिल परिवारों को नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा अलग रखने के लिए बैग भी दिए गए। निगम की योजना धीरे-धीरे इस अभियान को पांचों जोन के 50,000 घरों तक पहुंचाने की है।
अधिकारियों का कहना है कि घर और संस्थान स्तर पर सही बंटवारे से रिसाइकिल होने वाली सामग्री को बेहतर तरीके से निकाला जा सकेगा, सड़ने वाले कचरे से खाद बनाना आसान होगा और आगे की प्रक्रिया ज्यादा कारगर होगी। इससे चेन्नई के डंपिंग ग्राउंड पर बोझ भी कम होगा और रिसाइकिल होने वाला तथा खतरनाक कचरा आम कचरे में मिलने से बचेगा।
जीसीसी ने लोगों, संस्थानों और व्यापारियों से सफाई कर्मचारियों का सहयोग करने और रंग-कोड वाले सिस्टम का लगातार पालन करने की अपील की है। नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई हो सकती है।
--आईएएएनएस
वीकेयू/एएस
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