
बैतूल जिले अंतर्गत चिचोली नगर में जैन समाज के सबसे पावन एवं प्रमुख धार्मिक पर्व 'पर्युषण' (दशलक्षण महापर्व) के समापन के पावन अवसर पर शनिवार को भगवान श्रीजी की भव्य शोभायात्रा श्रद्धा और उल्लास के साथ निकाली गई। इस दौरान पूरा नगर भगवान महावीर और पार्श्वनाथ के जयकारों से गूंज उठा तथा समूचा वातावरण धर्ममय नजर आया। समाज के महिला, पुरुष, वृद्ध और युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर पूरे समर्पण भाव से भगवान श्रीजी की आराधना और वंदना की।

शोभायात्रा का औपचारिक शुभारंभ नगर के प्राचीन पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर से हुआ। चल समारोह के सबसे आगे धर्मध्वजा थामे समाज के उत्साही युवा चल रहे थे, जबकि सजे-धजे अश्व और सुमधुर धार्मिक धुनों की प्रस्तुति देते बैंड-बाजे शोभायात्रा के आकर्षण को बढ़ा रहे थे। भगवान श्रीजी की नयनाभिराम प्रतिमा को विशेष रूप से सुसज्जित बैलगाड़ी (रथ) में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। पारंपरिक श्वेत और केसरिया वस्त्रों में सुसज्जित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रभु की अगवानी में भक्ति नृत्य किया।

पार्श्वनाथ मंदिर से प्रारंभ होकर यह भव्य शोभायात्रा बाजार चौक, अहिंसा चौक, सराफा बाजार, वीर दुर्गादास चौक, बस स्टैंड तथा मुख्य जयस्तंभ चौक होते हुए पुनः पार्श्वनाथ मंदिर पहुंची। नगर भ्रमण के दौरान विभिन्न व्यापारिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों द्वारा तोरण द्वारों तथा रंगोलियों से मार्ग को सजाया गया था। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर व पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का आत्मीय स्वागत किया और भगवान श्रीजी के मंगल दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
शोभायात्रा के पुनः मंदिर प्रांगण पहुंचने पर वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ भगवान श्रीजी का वृहद शांतिधारा एवं महामस्तकाभिषेक संपन्न कराया गया। विश्व शांति और जनकल्याण की कामना के साथ श्रद्धालुओं ने प्रभु चरणों में शीश नवाया। पर्व के समापन उपलक्ष्य में उदार सागर युवा मंच एवं सकल जैन समाज चिचोली के सौजन्य से एक भव्य वात्सल्य भोज (सामूहिक स्नेह मिलन) का आयोजन भी किया गया, जिसमें समाज के सभी बंधुओं ने एक साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण की और एक-दूसरे से क्षमावाणी पर्व के भाव साझा किए।
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