
नई दिल्ली। कैबिनेट द्वारा स्वीकृत दो प्रमुख रेल परियोजनाएं—गाजियाबाद-सीतापुर और राजमहेंद्रवरम-विशाखापत्तनम—भारत के परिवहन मानचित्र को बदलने वाली हैं। गाजियाबाद-सीतापुर कॉरिडोर का विस्तार इसलिए अनिवार्य हो गया था क्योंकि यह दिल्ली को उत्तर प्रदेश के सघन आबादी वाले और औद्योगिक रूप से सक्रिय क्षेत्रों से जोड़ता है। वर्तमान में यहाँ रेल पटरियों पर क्षमता से 168% अधिक बोझ है, जिससे ट्रेनों की गति और समयबद्धता प्रभावित होती है। तीसरी और चौथी लाइन बिछने से न केवल मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होगी, बल्कि लखनऊ और दिल्ली के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
वहीं, आंध्र प्रदेश में राजमहेंद्रवरम से विशाखापत्तनम तक का विस्तार भारत के 'ब्लू इकोनॉमी' विजन को सहारा देता है। यह खंड विशाखापत्तनम, गंगावरम और काकीनाडा जैसे प्रमुख बंदरगाहों को देश के भीतरी हिस्सों से जोड़ता है। गोदावरी नदी पर नए पुलों और बाईपास का निर्माण परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करेगा, जिससे निर्यात-आयात (EXIM) व्यापार को गति मिलेगी।
इन परियोजनाओं का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू इनका 'इको-फ्रेंडली' होना है। सड़क परिवहन की तुलना में रेल परिवहन काफी कम ऊर्जा की खपत करता है। आंकड़ों के अनुसार, इन विस्तारों से लगभग 180 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन (CO2) में कमी आएगी। यह पर्यावरणीय लाभ 7 करोड़ से अधिक परिपक्व वृक्षों द्वारा अवशोषित कार्बन के बराबर है। यह कदम भारत के 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तीसरे चरण को मार्च 2028 तक बढ़ाना ग्रामीण भारत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार ने इसके लिए ₹83,977 करोड़ का विशाल बजट आवंटित किया है। यह केवल सड़कें बनाने की योजना नहीं है, बल्कि यह गाँवों को प्रगति की मुख्यधारा से जोड़ने का एक पुल है। जब एक गाँव की सड़क सीधे कृषि मंडी (Mandi), जिला अस्पताल या स्कूल से जुड़ती है, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था में स्वतः ही उछाल आता है। इससे किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य मिलता है और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 2% महंगाई भत्ते (DA) की बढ़ोतरी वैश्विक मुद्रास्फीति के दौर में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है। 1.18 करोड़ लोगों (कर्मचारी और पेंशनभोगी) के हाथों में अतिरिक्त क्रय शक्ति आने से बाजार में मांग बढ़ेगी, जो अंततः अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक है।
साथ ही, 'भारत समुद्री बीमा पूल' की स्थापना एक रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक है। वर्तमान में, भारतीय जहाज काफी हद तक विदेशी बीमा कंपनियों पर निर्भर हैं, जो अक्सर भू-राजनीतिक तनाव (जैसे लाल सागर संकट या रूस-यूक्रेन युद्ध) के दौरान प्रीमियम बढ़ा देती हैं। ₹12,980 करोड़ की संप्रभु गारंटी के साथ, भारत अब अपने व्यापारिक बेड़े को स्वयं सुरक्षा प्रदान कर सकेगा। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की आत्मनिर्भरता और साख भी बढ़ेगी।
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