
नई दिल्ली. दिल्ली की सियासत में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए कांग्रेस ने एक मास्टरप्लान तैयार किया है। शनिवार को दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने “बेहतर दिल्ली” अभियान की घोषणा की, जिसका लक्ष्य साल 2030 तक दिल्ली की सत्ता में वापसी करना है। इस अभियान के जरिए पार्टी मोहल्ला स्तर पर जनता से जुड़ेगी और मौजूदा राजनीतिक शून्यता को भरने का प्रयास करेगी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कोषाध्यक्ष अजय माकन, दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव और यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु चिब ने इस कैंपेन का आधिकारिक ऐलान किया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि 1 मई से शुरू होने वाला यह अभियान तीन मुख्य स्तंभों पर टिका होगा:
संवाद: जनता की समस्याओं को सुनना।
संघर्ष: सरकार की विफलताओं के खिलाफ आवाज उठाना।
समाधान: दिल्ली के विकास के लिए वैकल्पिक नीतियां पेश करना।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने केंद्र की भाजपा सरकार और आम आदमी पार्टी (AAP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के जाने के बाद पिछले 12 साल केवल केंद्र और राज्य के बीच टकराव की भेंट चढ़ गए।
माकन ने आरोप लगाया कि "परिपक्व नेतृत्व की कमी" के कारण कभी 'ग्रीन कैपिटल' कहलाने वाली दिल्ली आज 'पॉल्यूशन कैपिटल' बन गई है। उन्होंने जोर दिया कि दिल्ली को अब ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो राजनीति के बजाय प्रशासन और विकास पर ध्यान दे।
इस अभियान की सबसे खास बात इसकी जमीनी रणनीति है। कांग्रेस कार्यकर्ता दिल्ली के हर मोहल्ले में जाकर स्थानीय मुद्दों जैसे— पानी की किल्लत, बिजली के बिल, बेरोजगारी और कूड़े के पहाड़ों पर चर्चा करेंगे।
टाइमलाइन रणनीति: पार्टी हर समस्या के समाधान के लिए सरकार को एक निश्चित समयसीमा (Deadline) देगी।
आंदोलन: यदि तय समय में सुधार नहीं होता, तो कांग्रेस जनता के साथ मिलकर सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करेगी।
पार्टी का यह अभियान विशेष रूप से यूथ कांग्रेस के कंधों पर है। कांग्रेस का मानना है कि 2014 के बाद से संगठन में आए खालीपन को भरने के लिए नई और ऊर्जावान पीढ़ी को आगे लाना जरूरी है। रणनीतिक रूप से कांग्रेस का लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना और 2030 के विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करना है।
कांग्रेस ने यह भी संकेत दिया कि वह भाजपा और आप दोनों के खिलाफ एक 'मजबूत विकल्प' के रूप में खुद को पेश करेगी, खासकर ऐसे समय में जब दिल्ली की सत्ता में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है।
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