
दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने करीब 49 दिनों के लंबे इंतजार के उपरांत जिला संगठन की कमान नए हाथों में सौंप दी है। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने वरिष्ठ कार्यकर्ता मानवेंद्र सिंह परिहार को दतिया का नया भाजपा जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। परिहार लंबे अरसे से संगठन की मुख्यधारा में सक्रिय रहे हैं और पूर्व में जिला महामंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी कुशलता से निभा चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का करीबी माना जाता है। ऐसे में उनकी यह ताजपोशी दतिया भाजपा के भीतर नए सिरे से संगठनात्मक संतुलन साधने और गुटीय खींचतान को थामने की रणनीतिक कवायद के रूप में देखी जा रही है।
गौरतलब है कि तीन अगस्त को आए उपचुनाव के नतीजों में भाजपा प्रत्याशी को लगभग 6 हजार मतों के अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा था। इस हार के कारणों की समीक्षा के लिए पार्टी ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति द्वारा सौंपी गई तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर अनुशासन का चाबुक चलाते हुए पार्टी नेतृत्व ने 4 अगस्त को तत्कालीन जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित पूरी जिला कार्यकारिणी, मंडल, मोर्चा और प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया था।
उपचुनाव से पहले पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा क्षेत्र में लगातार सक्रिय थे और उन्होंने नामांकन पत्र तक खरीद लिया था। हालांकि, केंद्रीय व प्रादेशिक नेतृत्व ने अंतिम समय में रणनीति बदलते हुए उनकी जगह आशुतोष तिवारी को अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया था। टिकट कटने के इस फैसले से नरोत्तम समर्थकों में तीखा आक्रोश फैल गया था, जिसके चलते तत्कालीन जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया था।
यद्यपि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इस्तीफा अस्वीकार करने और स्वयं नरोत्तम मिश्रा द्वारा समझाइश दिए जाने के बाद कुशवाह संगठन कार्य में जुटे, लेकिन भितरघात और कार्यकर्ताओं की नाराजगी के चलते भाजपा यह सीट नहीं बचा सकी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अगस्त माह में आशुतोष तिवारी को भी जिलाध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाएं चली थीं, किंतु उन्होंने स्वयं यह जिम्मेदारी लेने से अनिच्छा जाहिर कर दी थी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले मानवेंद्र सिंह परिहार पूर्व में भी जिलाध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार रहे थे। अब जब उन्हें यह अहम कमान मिली है, तो सबकी निगाहें जल्द घोषित होने वाली नई जिला कार्यकारिणी, मंडल अध्यक्षों और मोर्चा-प्रकोष्ठों के पुनर्गठन पर टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले करीब 15 वर्षों से दतिया भाजपा संगठन पर पूरी तरह पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा खेमे का वर्चस्व रहा है।
हार के बाद भी नरोत्तम मिश्रा क्षेत्र में निरंतर जनसंपर्क में बने हुए हैं। हाल ही में विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान वे करीब 500 गाड़ियों के विशाल काफिले के साथ शक्ति प्रदर्शन करते नजर आए, जिसमें स्थानीय प्रत्याशी खेमे की दूरी साफ दिखाई दी। वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटैरिया के अनुसार, पार्टी अब संगठन को एकतरफा प्रभाव से निकालकर संतुलित करने के प्रयास में है। आगामी नगरीय निकाय चुनावों और 2028 के आम विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नए जिलाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह परिहार के सामने सभी गुटों को एकजुट रखने, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और अंतर्कलह को समाप्त करने की बेहद कठिन परीक्षा होगी।
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