
इंदौर के जूनी थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक बड़ा लिफ्ट हादसा सामने आया, जहां एक पुरानी बहुमंजिला इमारत की लिफ्ट अचानक चौथी मंजिल से सीधे नीचे आ गिरी। इस भीषण दुर्घटना में लिफ्ट में सवार करीब सात लोग घायल हो गए, जिनमें से एक व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों में पंजाब से शहर घूमने आए छह पर्यटक भी शामिल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तकनीकी खराबी और अचानक केबल में आए खिंचाव या टूटन के चलते लिफ्ट अनियंत्रित होकर नीचे गिरी, जिससे भीतर सवार लोगों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश की व्यावसायिक और आवासीय इमारतों में लगी लिफ्टों की सुरक्षा, नियमित मेंटेनेंस और तकनीकी जांच के अभाव को उजागर कर दिया है। जिस इमारत में यह हादसा हुआ, वह कई दशक पुरानी बताई जा रही है, जहां वर्षों से लिफ्ट के पुर्जों और सुरक्षा मानकों का समुचित ऑडिट नहीं कराया गया था।
लिफ्ट सुरक्षा में लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। बीते रविवार को राजधानी भोपाल के एक प्रतिष्ठित 5 स्टार होटल में भी तकनीकी खराबी के चलते लिफ्ट बीच में ही अटक गई थी। इस घटना में एक वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी की पत्नी सहित तीन लोग करीब 20 से 25 मिनट तक सांस रोककर अंदर फंसे रहे। सूचना मिलते ही नगर निगम के दमकल व विद्युत अमले ने मौके पर पहुंचकर मशक्कत के बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।
जांच के दौरान पाया गया कि होटल की लिफ्ट में आपात स्थिति में काम करने वाला ऑटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस (ARD) निष्प्रभावी था। यह डिवाइस बिजली गुल होने या अचानक खराबी आने पर लिफ्ट को नजदीकी फ्लोर तक लाकर दरवाजा खोलने का कार्य करता है। सुरक्षा मानकों में भारी लापरवाही पाए जाने पर नगर निगम प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए होटल की तीनों लिफ्टों को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से सील कर दिया है। प्रदेश में रीवा के अस्पताल में लिफ्ट में गर्दन फंसने से हुई मरीज की मौत जैसी घटनाओं ने भी नियामक तंत्र की अनुपस्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रदेशभर में लगातार बढ़ रहे हादसों को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश शासन अब महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली की तर्ज पर एक समग्र 'लिफ्ट एवं एस्केलेटर कानून' लागू करने की अंतिम तैयारी में है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग (UADD) द्वारा इस कानून का विस्तृत ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है।
तैयार प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:
अनिवार्य पंजीयन: पुरानी और नई सभी इमारतों में लगी लिफ्टों और स्वचालित सीढ़ियों (एस्केलेटर) का सक्षम प्राधिकारी के पास रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम: लिफ्ट की स्थापना की मंजूरी, आवधिक तकनीकी निरीक्षण (इंस्पेक्शन) और नियमित मेंटेनेंस के रिकॉर्ड संधारण हेतु एक पारदर्शी ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाएगा।
सख्त ऑडिट व पेनाल्टी: सुरक्षा मानकों (जैसे ARD सिस्टम और ओवरलोड सेंसर) की अनदेखी करने वाले भवन स्वामियों और मेंटेनेंस एजेंसियों पर भारी जुर्माने और वैधानिक कार्रवाई का प्रावधान रहेगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस विधेयक के मसौदे को जल्द ही सीनियर सेक्रेटरी कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसके बाद कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही इसे आगामी विधानसभा सत्र में कानून के रूप में पारित कराया जाएगा। वर्तमान में देश के 10 राज्यों में लिफ्ट अधिनियम प्रभावी हैं, और अब मध्य प्रदेश भी इस कड़े सुरक्षा घेरे को लागू करने की दिशा में अग्रसर है।
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