
वॉशिंगटन/तेहरान. ईरान के कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत की बर्फीली और पथरीली पहाड़ियों में पिछले 36 घंटों से चल रहा 'सस्पेंस' अब खत्म हो गया है. अमेरिकी F-15 फाइटर जेट के मार गिराए जाने के बाद लापता हुए दूसरे क्रू मेंबर (एयरमैन) को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने एक बेहद घातक और साहसी ऑपरेशन में सुरक्षित बचा लिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मिशन की सफलता पर सेना को बधाई देते हुए इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास का "सबसे जांबाज रेस्क्यू मिशन" करार दिया है.
दुश्मन के घेरे में 36 घंटे: SERE ट्रेनिंग ने बचाई जान
शुक्रवार को जब ईरान ने अमेरिकी F-15 विमान को मार गिराया, तो पायलट को तुरंत बचा लिया गया था, लेकिन वेपन सिस्टम ऑफिसर (WSO) लापता हो गया था. घायल होने के बावजूद इस ऑफिसर ने हार नहीं मानी. उसने अपनी SERE (Survival, Evasion, Resistance, and Escape) ट्रेनिंग का बखूबी इस्तेमाल किया और ईरानी सेना की नजरों से बचकर पहाड़ियों की ओट में खुद को छिपाए रखा.
आसमान से बरसी आग, जमीन पर उतरे कमांडो
शनिवार को शुरू हुए इस रेस्क्यू ऑपरेशन में अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी.
हवाई सुरक्षा: दर्जनों अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने उस इलाके को घेर लिया ताकि ईरानी सेना वहां तक न पहुँच सके.
भारी गोलीबारी: रेस्क्यू के दौरान ईरानी ग्राउंड फोर्स और अमेरिकी कमांडो के बीच भीषण मुठभेड़ हुई.
सफलता: अमेरिकी स्पेशल यूनिट ने घायल ऑफिसर को सुरक्षित उठाया और दुश्मन की सीमा से बाहर निकाल लिया.
ट्रम्प का बड़ा बयान
व्हाइट हाउस से जारी बयान में राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि यह ऑपरेशन दिखाता है कि अमेरिका अपने एक भी सैनिक को दुश्मन के पीछे नहीं छोड़ता. उन्होंने इस सफल मिशन को अमेरिकी शौर्य का प्रतीक बताया.
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