
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने जनगणना-2027 में मजरे-टोलों के लिए अलग कॉलम जोड़ने की मांग की है। उन्होंने यह प्रस्ताव शुक्रवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर प्रशिक्षण कार्यक्रम में रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के समक्ष रखा।
मुख्य सचिव ने कहा कि यदि जनगणना में मजरे-टोलों का पृथक कॉलम जोड़ा जाता है तो प्रदेश के लगभग 1.27 लाख मजरे-टोलों में रहने वाली आबादी की सटीक जानकारी सामने आएगी। इससे जल जीवन मिशन सहित कई सरकारी योजनाओं के बेहतर नीति निर्माण में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि ये मजरे-टोले अधिकतर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्थित हैं, इसलिए इस बदलाव से अन्य आदिवासी राज्यों को भी लाभ होगा।
डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना
मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि देश में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना कराई जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है और स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। नागरिक मोबाइल, लैपटॉप और डेस्कटॉप के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इस बार जातिगत जनगणना भी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर में इनबिल्ट एप्लीकेशन जोड़े गए हैं, जो डाटा फीडिंग के दौरान संभावित त्रुटियों को चिन्हित कर सुधार में मदद करेंगे।
दो चरणों में होगी प्रक्रिया
निदेशक जनगणना कार्तिकेय गोयल ने बताया कि प्रदेश में प्रथम चरण के तहत 1 से 30 मई तक मकानों की सूची तैयार की जाएगी। इसमें घर-घर जाकर मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्र किया जाएगा।
द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना का कार्य होगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और संतानों से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।
33 बिंदुओं पर ली जाएगी जानकारी
जनगणना के दौरान भवन संख्या, घर की संरचना, उपयोग, स्वामित्व, कमरों की संख्या, पेयजल स्रोत, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, ईंधन, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन, मुख्य खाद्यान्न और मोबाइल नंबर सहित कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे।
मुख्य सचिव ने नागरिकों से अपील की कि वे सही और सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि जनगणना के आंकड़े विश्वसनीय हों और योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंच सके।

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