
नई दिल्ली। ऑनलाइन खरीदारी के दौरान दिखने वाले भारी-भरकम 'फर्जी डिस्काउंट' और भ्रामक सर्च नतीजों पर अब केंद्र सरकार सख्त हो गई है। उपभोक्ता मामले विभाग ने ई-कॉमर्स क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए 'उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020' में बड़ा संशोधन किया है। ये नए दिशा-निर्देश 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू होंगे।
नए नियमों के अनुसार, ई-कॉमर्स कंपनियां अब सर्च नतीजों में मनमाना फेरबदल नहीं कर सकेंगी। अक्सर प्लेटफॉर्म्स सस्ते और सटीक विकल्पों के बजाय अपने इन-हाउस या महंगे उत्पादों को ऊपर दिखाते थे, जिस पर अब रोक लगेगी। इसके अलावा, किसी भी पेड या विज्ञापित उत्पाद पर 'स्पॉन्सर्ड' (Sponsored) टैग स्पष्ट और प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा, ताकि खरीदार सामान्य और प्रायोजित प्रॉडक्ट में अंतर समझ सकें।
कंपनियों को 'डार्क पैटर्न्स दिशा-निर्देश, 2023' का कड़ाई से पालन करना होगा। इसके तहत हर साल सेल्फ-ऑडिट कर अनुपालन प्रमाण पत्र सार्वजनिक करना जरूरी होगा। चेकआउट के दौरान चोरी-छिपे जबरन अतिरिक्त शुल्क (जैसे बिना मांगे अकाउंट प्रोटेक्शन फीस) जोड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही आयातित सामान पर आयातक का विवरण और 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' दर्शाना अनिवार्य रहेगा।
उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को 'नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन' (NCH) के कन्वर्जेंस सिस्टम से जुड़ना होगा। साल 2025 में NCH को मिली 17.71 लाख से अधिक शिकायतों में करीब 29 प्रतिशत अकेले ई-कॉमर्स से संबंधित थीं। नए नियमों के तहत शिकायत दर्ज कराने पर उपभोक्ता को उसकी लिखित प्रति भी दी जाएगी। इसके अलावा, ग्राहक की सहमति के बिना उसके डेटा का व्यावसायिक उपयोग करने पर भी रोक लगाई गई है।
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