
जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात आध्यात्मिक गुरु महर्षि महेश योगी संस्थान की बेशकीमती जमीनों के फर्जीवाड़े और अवैध खरीद-फरोख्त के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों (Fake Documents) के सहारे आश्रम की अरबों रुपए की संपत्तियों को अवैध तरीके से बेचने का एक बड़ा रैकेट चला रखा था। इस मामले में जांच एजेंसी को मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के पुख्ता सबूत मिले हैं।
प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान जी रामचंद्र मोहन और आकाश मालवीय के रूप में हुई है। इन दोनों आरोपियों पर आरोप है कि इन्होंने महर्षि महेश योगी संस्थान के फर्जी और जाली कागजात तैयार कर विभिन्न शहरों में स्थित आश्रमों की जमीनों का अवैध सौदा किया।
प्रारंभिक पूछताछ और पड़ताल में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर (Financial Fraud) के संकेत मिले हैं। जांच दल का मानना है कि इस पूरे लैंड स्कैम को एक सुनियोजित और संगठित गिरोह (Organized Gang) अंजाम दे रहा था, जिसमें कुछ रसूखदार राजनेताओं, अधिकारियों और भू-माफियाओं की संलिप्तता होने की पूरी आशंका है।
जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त का यह पूरा सिंडिकेट कई राज्यों में सक्रिय था। आरोपियों द्वारा मुख्य रूप से चार बड़े शहरों की कीमती जमीनों को निशाना बनाया गया था:
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में संस्थान की मुख्य संपत्तियां
बिलासपुर और रायपुर (छत्तीसगढ़) के वीआईपी इलाकों में स्थित जमीनें
नोएडा (उत्तर प्रदेश) की बहुमूल्य व्यावसायिक और आवासीय भूमि
इन शहरों में स्थित आश्रमों की कीमती जमीनों को जाली कागजात और फर्जी ट्रस्टियों के नाम पर ठिकाने लगाने की साजिश रची जा रही थी। ईडी अब इस बात की कड़ाई से कड़ियों को जोड़ रही है कि इस महा-घोटाले से कमाए गए करोड़ों-अरबों रुपए किन फर्जी बैंक खातों और शेल कंपनियों में ट्रांसफर किए गए। जांच एजेंसी के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
इस पूरे सुनियोजित फर्जीवाड़े को लेकर महर्षि संस्थान द्वारा देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया गया था। मामले की गंभीरता और कई राज्यों में इसके फैले जाल को देखते हुए न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल चंदोरकर की पीठ ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary of UP) की सीधी देखरेख में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन करने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया है।
शीर्ष अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की विभिन्न अदालतों में मामले लंबित होने के बावजूद आखिर इन विवादित संपत्तियों की अवैध बिक्री कैसे कर दी गई? सुप्रीम कोर्ट ने बिना अनुमति बेची गई सभी जमीनों की सघन जांच कर तीन महीने के भीतर एक व्यापक 'फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट' सौंपने का निर्देश दिया है।
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