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'एक चट्टान से तराशा कमाल ...' एलोरा गुफाओं की खूबसूरती के मुरीद हुए शेखर कपूर

मुंबई, 11 जनवरी (आईएएनएस)। भारत मंदिरों का देश है, यहां प्राचीन समय में बने एक से बढ़कर एक खूबसूरत और हैरत में डालने वाले मंदिर हैं। प्राचीन भारतीय वास्तुकला को देखकर फिल्म निर्माता-निर्देशक शेखर कपूर भी कायल नजर आए।

मुंबई, 11 जनवरी (आईएएनएस)। भारत मंदिरों का देश है, यहां प्राचीन समय में बने एक से बढ़कर एक खूबसूरत और हैरत में डालने वाले मंदिर हैं। प्राचीन भारतीय वास्तुकला को देखकर फिल्म निर्माता-निर्देशक शेखर कपूर भी कायल नजर आए।

सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उन्होंने एलोरा गुफाओं की नक्काशी को न केवल अद्भुत बल्कि बताया कि प्राचीन भारत का दर्शन आज के क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल इसमें बखूबी हुआ है।

शेखर कपूर ने इंस्टाग्राम पर किए पोस्ट के जरिए प्राचीन भारतीय वास्तुकला और ज्ञान की गहराई के बारे में बात की। उन्होंने यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल में शामिल किए महाराष्ट्र स्थित एलोरा गुफाओं का जिक्र किया।

उन्होंने वहां स्थित मंदिर का जिक्र करते हुए लिखा, "शिल्पकारों ने एक ही बड़ी चट्टान को तराशकर पूरा मंदिर बनाया। उन्होंने सिर्फ हथौड़े और छेनी का इस्तेमाल किया, कोई दूसरा औजार नहीं लिया फिर भी मंदिर के अंदर की नक्काशी और मूर्तियां इतनी खूबसूरत और सटीक हैं कि हर डिटेल, हर ज्यामिति और हर रूप बिल्कुल सही लगता है, ऊपर से नीचे तक कुछ भी गलत नहीं।"

उन्होंने मंदिर और मूर्तियों की बनावट पर हैरानी जताते हुए आगे बताया, "सोचिए अगर किसी मूर्ति की नाक भी थोड़ी-सी गलत हो जाती, तो क्या होता? क्या पूरा मंदिर दोबारा बनाना पड़ता? नहीं! क्योंकि उन्होंने कभी गलती नहीं की। उन्होंने कैसे इतनी सटीकता बरती? यह रहस्य गीजा के पिरामिड से भी बड़ा है। प्राचीन भारत में हमारी गणित की प्रणाली शास्त्रों से आई। इसी ने हमारे संगीत (ताल), कला और वास्तुकला की नींव रखी। हमारा दर्शन कभी रैखिक (सीधा) नहीं था, बल्कि गोलाकार था, ठीक वैसे ही जैसे ब्रह्मांड की संरचना होती है। आज मॉडर्न साइंस इसी के सबसे करीब पहुंचा है। हम इसे क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम एंटैंगलमेंट कहते हैं। इन्हीं सिद्धांतों पर गूगल ने दुनिया का सबसे तेज क्वांटम कंप्यूटर 'विलो' बनाया।"

उन्होंने आगे बताया, "अंग्रेजों ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को बदल दिया और उसे रैखिक बना दिया। उपनिवेशवादियों को क्वांटम जैसी समझ नहीं थी, लेकिन हमें थी। समय के साथ हमने ज्ञान और बुद्धि दोनों को हानि पहुंचाई। बुद्धि के बिना ज्ञान सूखा हो जाता है, उसमें से सच्चा और गहरा अर्थ निकल नहीं पाता। इसलिए कोई हैरानी नहीं कि जब दुनिया के सबसे महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन से पूछा गया, “आपने वे सबसे जटिल सवाल कैसे हल किए, जिन्हें दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिक और गणितज्ञ हल नहीं कर पाए?” तो रामानुजन ने बहुत सरलता से जवाब दिया, मेरी देवी मेरे पास आती हैं।”

--आईएएनएस

एमटी/एबीएम

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