
नई दिल्ली. भारत में पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक स्कूटर (Electric Scooters) का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है. पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों के बीच पर्यावरण के अनुकूल और किफायती होने के कारण लोग पारंपरिक स्कूटरों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्राथमिकता दे रहे हैं. हालांकि, पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के मुकाबले इलेक्ट्रिक स्कूटर की तकनीक काफी अलग होती है. कई बार वाहन चालकों को इसकी तकनीकी बारीकियों की पूरी जानकारी नहीं होती.
जिसके कारण वे कुछ ऐसी अनजाने में गलतियां कर बैठते हैं जो सीधे तौर पर स्कूटर की सबसे अहम और महंगी चीज-यानी उसकी बैटरी को प्रभावित करती हैं. एक इलेक्ट्रिक स्कूटर में बैटरी सबसे कीमती कंपोनेंट होती है, और यदि वह समय से पहले खराब हो जाए, तो उसे बदलने में हजारों रुपये का भारी-भरकम खर्च आ सकता है. इसलिए बैटरी की लाइफ (Battery Life) को सुरक्षित रखना हर ईवी मालिक के लिए बेहद जरूरी है.
1. अचानक तेज स्पीड बढ़ाना (Aggressive Acceleration)
समस्या क्या है: पेट्रोल स्कूटरों को चलाने की आदत के कारण कई लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर में भी एक्सीलेटर को पूरी तरह से एक झटके में ऐंठ देते हैं (Quick Throttle) जिससे स्कूटर तुरंत अत्यधिक रफ्तार पकड़ लेता है.
नुकसान: इस तरह अचानक पिकअप लेने से बैटरी पर एक साथ बहुत ज्यादा लोड (Current Load) पड़ता है. इसके परिणामस्वरूप बैटरी तेजी से डिस्चार्ज होने लगती है और बहुत जल्दी गर्म (Overheat) हो जाती है. लगातार ऐसा करने से बैटरी की रासायनिक क्षमता समय से पहले ही कमजोर होने लगती है.
बचाव का तरीका: हमेशा अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर की स्पीड को धीरे-धीरे और स्मूथ तरीके से (Gradually) बढ़ाएं. इससे बैटरी पर अचानक दबाव नहीं पड़ता और उसकी सेहत बरकरार रहती है.
2. तेज धूप या अत्यधिक तापमान में पार्क करना (Parking in Direct Sunlight)
समस्या क्या है: पेट्रोल वाहनों को धूप में खड़ा करने से आमतौर पर उनके इंजन या बॉडी पर कोई खास नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है. यही वजह है कि लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर को भी कहीं भी खुले में धूप में घंटों के लिए खड़ा कर देते हैं.
नुकसान: इलेक्ट्रिक स्कूटरों में इस्तेमाल होने वाली लीथियम-आयन (Lithium-ion) बैटरियां अत्यधिक तापमान (Extreme Temperatures) के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं. राइडिंग के तुरंत बाद या सामान्य स्थिति में भी यदि स्कूटर को तेज धूप में छोड़ दिया जाए, तो बैटरी का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है, जिससे उसकी लाइफ तेजी से घटने लगती है.
बचाव का तरीका: हमेशा अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर को छांव में, ढकी हुई पार्किंग में या किसी पेड़ के नीचे ही पार्क करने की आदत डालें.
3. राइडिंग के तुरंत बाद चार्जिंग पर लगाना (Charging Immediately After Riding)
समस्या क्या है: दफ्तर या सफर से घर लौटने पर अक्सर लोगों की आदत होती है कि वे स्कूटर को आते ही तुरंत चार्जिंग प्लग में लगा देते हैं, ताकि अगली यात्रा के लिए वह पूरी तरह तैयार रहे.
नुकसान: जब आप स्कूटर चलाकर आते हैं, तो लगातार डिस्चार्ज होने के कारण बैटरी का आंतरिक तापमान पहले से ही काफी हाई (गर्म) होता है. ऐसी गर्म अवस्था में तुरंत चार्जिंग पर लगा देने से बैटरी और अधिक गर्म हो जाती है, जिससे थर्मल स्ट्रेस बढ़ता है और बैटरी की सेल डैमेज हो सकती है.
बचाव का तरीका: सफर पूरा करने के बाद स्कूटर को कम से कम आधे से एक घंटे के लिए शांत छोड़ दें, ताकि बैटरी का तापमान सामान्य (Room Temperature) हो जाए. इसके बाद ही उसे चार्जिंग पर लगाएं.
4. लगातार फास्ट चार्जिंग का अत्यधिक उपयोग (Frequent Use of Fast Chargers)
समस्या क्या है: आज के समय में मार्केट में आ रहे नए इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में फास्ट चार्जिंग (Fast Charging) का सपोर्ट भी मिलने लगा है. लोग समय बचाने और जल्दी चार्ज करने के लिए बार-बार पब्लिक स्टेशन पर लगे फास्ट चार्जर का इस्तेमाल करते हैं.
नुकसान: फास्ट चार्जर बहुत कम समय में बैटरी के अंदर अत्यधिक करंट भेजते हैं, जिससे बैटरी के भीतर केमिकल रिएक्शन बहुत तेज होता है. यदि रोजाना या बार-बार इसी विधि का उपयोग किया जाए, तो बैटरी की कुल जीवन अवधि (Life Span) बहुत तेजी से कम होने लगती है.
बचाव का तरीका: सार्वजनिक फास्ट चार्जर का इस्तेमाल केवल तभी करें जब बेहद इमरजेंसी हो. रोजमर्रा के इस्तेमाल और घर पर चार्जिंग के लिए हमेशा कंपनी द्वारा दिए गए सामान्य (Slow/Home Charger) चार्जर का ही उपयोग करना सबसे सुरक्षित और बेहतरीन विकल्प माना जाता है.
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