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महिला आरक्षण पर यूपी विधानसभा में 'संग्राम': CM योगी का विपक्ष पर तीखा प्रहार- "इनकी रग-रग में नारी का अपमान, ये लोग जन्मजात महिला विरोधी"

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र की कार्यवाही आज हंगामेदार रही। इस सत्र का मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण बिल के समर्थन में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाना है। सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और उन्हें 'जन्मजात महिला विरोधी' करार दिया।

"गिरगिट की तरह रंग बदलता है विपक्ष"- CM योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष के पास अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने का बेहतरीन मौका था, लेकिन उन्होंने इसे गंवा दिया।

  • सपा-कांग्रेस पर हमला: सीएम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा कभी नहीं चाहती थीं कि महिला आरक्षण लागू हो। उन्होंने नारा दिया— "देख सपाई, बिटिया घबराई"

  • माफी की मांग: योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा की छवि हमेशा से महिला विरोधी रही है और उन्हें अपने व्यवहार के लिए प्रदेश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को अधिकार दिलाना भाजपा सरकार का प्राथमिक लक्ष्य है।

INDI गठबंधन ने महिलाओं को अधिकार से वंचित किया- सुरेश खन्ना

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने भी INDI गठबंधन पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रयास था कि 2029 के चुनावों में महिलाओं को 33% आरक्षण मिले, लेकिन विपक्षी दलों के आचरण ने उन्हें इस हक से वंचित कर दिया। वहीं, मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सपा पर दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि आज सदन में निंदा प्रस्ताव पारित होकर रहेगा।

"संसार का सबसे बड़ा झूठ"- शिवपाल यादव का पलटवार

सत्ता पक्ष के आरोपों पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने पलटवार करते हुए इसे "संसार का सबसे बड़ा झूठ" बताया।

  • राजनीतिक फायदा: शिवपाल यादव ने कहा कि सरकार केवल राजनीति और फायदे-नुकसान के लिए यह विशेष सत्र बुला रही है। उन्होंने मांग की कि अगर महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो गया था, तो उसे तुरंत लागू करना चाहिए।

  • समर्थन का वादा: उन्होंने कहा कि सपा हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाने की पक्षधर रही है और सरकार अगर सही मंशा से प्रस्ताव लाएगी, तो वे समर्थन करेंगे।

आरक्षण के भीतर आरक्षण की मांग

सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने पार्टी का स्टैंड साफ करते हुए कहा कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे 'सामाजिक न्याय' चाहते हैं। सपा की मांग है कि इस 33% आरक्षण के भीतर दलित, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से कोटा निर्धारित किया जाना चाहिए, अन्यथा यह बिल सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।

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