अलीगढ़, 6 नवंबर (आईएएनएस)। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) छात्रसंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष नोमान अशरफ ने कहा कि आठ साल बाद हुए छात्रसंघ चुनाव के बाद उनकी पहली प्राथमिकता छात्रों से किए गए वादों और घोषणापत्र को पूरा करना होगी। विश्वविद्यालय में छात्रों के सामने कई गंभीर समस्याएं हैं, जिनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। हॉस्टल, खाने की व्यवस्था, रोजगार और प्लेसमेंट, महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार तथा भाई-भतीजावाद जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से काम किया जाएगा।
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अलीगढ़, 6 नवंबर (आईएएनएस)। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) छात्रसंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष नोमान अशरफ ने कहा कि आठ साल बाद हुए छात्रसंघ चुनाव के बाद उनकी पहली प्राथमिकता छात्रों से किए गए वादों और घोषणापत्र को पूरा करना होगी। विश्वविद्यालय में छात्रों के सामने कई गंभीर समस्याएं हैं, जिनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। हॉस्टल, खाने की व्यवस्था, रोजगार और प्लेसमेंट, महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार तथा भाई-भतीजावाद जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से काम किया जाएगा।
नोमान अशरफ ने कहा कि आठ साल के लंबे अंतराल के बाद छात्रसंघ चुनाव हुए हैं। इस दौरान छात्रों की समस्याएं काफी बढ़ गई हैं और उनके सामने कई चुनौतियां हैं। चुनाव प्रचार के दौरान छात्रों से जो वादे किए गए और जो घोषणापत्र जारी किया गया है, सबसे पहले उसी पर गंभीरता से काम किया जाएगा। छात्रों की अपेक्षाओं को पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है और समस्याओं का समाधान एक-एक करके किया जाएगा।
अपने वायरल बयान को लेकर उठ रहे सवालों पर नोमान अशरफ ने कहा कि उनके बयान को पूरे संदर्भ में समझने के बजाय तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को पहले उनका पूरा बयान सुनना और समझना चाहिए कि उन्होंने वास्तव में क्या कहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपने बयान में उन्होंने भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और गंगा-जमुनी तहजीब की बात की थी। इसके साथ ही सर सैयद के एक कथन का भी उल्लेख किया था। अशरफ के मुताबिक, बयान का एक हिस्सा अलग करके प्रस्तुत किए जाने से उसका वास्तविक संदर्भ बदल जाता है और लोगों के सामने उसका गलत अर्थ पहुंचता है।
मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व और उनके बयान को लेकर हो रही प्रतिक्रियाओं पर उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। अदालत को अपना फैसला सुनाने देना चाहिए। यदि अदालत किसी व्यक्ति को दोषी साबित करती है तो उसे दोषी माना जाएगा, लेकिन जब तक मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब तक उस पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। किसी को भी बिना न्यायिक फैसले के आतंकवादी घोषित नहीं किया जाना चाहिए, चाहे वह कोई भी व्यक्ति हो। उनके अनुसार न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्षता का सम्मान करना जरूरी है।
आठ साल बाद एएमयू में छात्रसंघ चुनाव होने और अन्य विश्वविद्यालयों में भी चुनाव कराने की आवश्यकता पर नोमान अशरफ ने कहा कि छात्र राजनीति का देश में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि एएमयू से भी कई ऐसे नेता निकले हैं, जिन्होंने देश के लिए योगदान दिया और उसका नाम रोशन किया। विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव नियमित रूप से होने चाहिए, ताकि छात्रों की आवाज केवल विश्वविद्यालय की चारदीवारी तक सीमित न रहे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सके।
चुनाव प्रचार के दौरान सामने आए प्रमुख मुद्दों पर अशरफ ने बताया कि छात्रों को हॉस्टल में उचित कमरे नहीं मिल पाने, खाने की व्यवस्था और नौकरी एवं प्लेसमेंट से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, महिला सुरक्षा और सिक्योरिटी भी एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई है। उन्होंने भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को भी गंभीर समस्या बताया। विश्वविद्यालय में समस्याओं का अंबार है और उनका समाधान एक साथ नहीं, बल्कि प्राथमिकता तय करके चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
--आईएएनएस
पीएसके
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