
नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध और ईरान-कतर के ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हमलों के बीच भारत सरकार ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को 'चाक-चौबंद' करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की धारा 3 को लागू कर दिया है। इसके तहत अब देश की सभी तेल और गैस कंपनियों (उत्पादन से लेकर वितरण तक) के लिए अपना रियल-टाइम डेटा सरकार के साथ साझा करना अनिवार्य होगा। इस ऐतिहासिक निर्णय का उद्देश्य किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सटीक योजना बनाना और देश में ईंधन की आपूर्ति श्रृंखला को टूटने से बचाना है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने जानकारी दी कि सरकार ने एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) को नोडल एजेंसी नामित किया है। अब कंपनियों को रिफाइनिंग, भंडारण, परिवहन, आयात-निर्यात और मार्केटिंग से जुड़ा हर छोटा-बड़ा डेटा वास्तविक समय में उपलब्ध कराना होगा। सुजाता शर्मा ने चेतावनी दी कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत जारी इन आदेशों का उल्लंघन एक आपराधिक अपराध माना जाएगा, जिसके लिए दोषी को कारावास (जेल) की सजा भी हो सकती है।
ईरान द्वारा कतर के ऊर्जा केंद्रों (रास लफान) पर किए गए हमले ने भारत की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि भारत अपनी कुल प्राकृतिक गैस (LNG) आयात का लगभग 47% कतर से प्राप्त करता है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि घबराने की जरूरत नहीं है। भारत वर्तमान में अमेरिका, रूस, वेनेजुएला और ऑस्ट्रेलिया सहित लगभग 40 देशों से कच्चा तेल और गैस आयात कर अपनी आपूर्ति को विविधता दे रहा है। सुजाता शर्मा ने पुष्टि की कि देश में तेल की आपूर्ति पर्याप्त है, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कहीं भी 'ड्राई-आउट' (पेट्रोल खत्म होने) की स्थिति नहीं है।
सरकार अब व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं को LPG सिलेंडर के बजाय पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) पर स्विच करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। पिछले दो हफ्तों में रिकॉर्ड 1.25 लाख नए PNG कनेक्शन दिए गए हैं। राहत की बात यह है कि उपभोक्ताओं में 'पैनिक बुकिंग' (घबराहट में बुकिंग) कम हुई है। 13 मार्च को जहाँ 89 लाख बुकिंग हुई थीं, वहीं अब यह गिरकर 57 लाख रह गई हैं। सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 94% ऑनलाइन बुकिंग और 83% OTP-आधारित डिलीवरी (DAC) का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
ईंधन की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र ने राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा है। राज्यों में कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं और संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी गई है। पेट्रोलियम कंपनियों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित निरीक्षण करें ताकि संकट की इस घड़ी में कोई भी उपभोक्ता का शोषण न कर सके।
Leave A Reviews