
वाशिंगटन. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने दुनिया को आने वाले बड़े आर्थिक झटकों के प्रति आगाह किया है। आईएमएफ और विश्व बैंक की स्प्रिंग मीटिंग के दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मध्य-पूर्व (Middle East) का संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
जॉर्जीवा ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आई बाधा ने तेल और ऊर्जा की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है।
फर्टिलाइजर का संकट: यह मार्ग केवल तेल ही नहीं, बल्कि वैश्विक उर्वरक (Fertilizer) आपूर्ति के लिए भी जीवन रेखा है। यदि उर्वरकों की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई, तो दुनियाभर में खेती की लागत बढ़ेगी और खाद्य कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकती हैं।
गरीब देशों पर दोहरी मार: कम आय वाले देशों में लोग अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं, ऐसे में बढ़ती खाद्य कीमतें वहां भुखमरी और सामाजिक अस्थिरता पैदा कर सकती हैं।
IMF ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में कटौती को लेकर सावधानी बरतने को कहा है। जॉर्जीवा के अनुसार, जिन देशों में महंगाई अभी भी अस्थिर है, वहां सख्त मौद्रिक नीति जारी रहनी चाहिए। वहीं, बेहतर स्थिति वाले देशों को "देखो और इंतजार करो" (Wait and Watch) की रणनीति अपनानी चाहिए।
बिगड़ते हालातों को देखते हुए IMF ने सदस्य देशों को वित्तीय सहायता देने के संकेत दिए हैं। अनुमान है कि आने वाले समय में करीब 20 से 50 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त फंडिंग की मांग उठ सकती है। जॉर्जीवा ने सरकारों को चेतावनी दी है कि वे टैक्स कटौती या निर्यात पर रोक जैसे 'अंधाधुंध' कदम न उठाएं, क्योंकि इससे महंगाई कम होने के बजाय और बढ़ सकती है।
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