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गुजरात: कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शुरू किया, छात्रों के भविष्य पर खतरा बताया


अहमदाबाद, 25 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को अहमदाबाद में अपना राष्ट्रव्यापी अभियान “छात्रों की गूंज” शुरू करते हुए आरोप लगाया कि देश की परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही अनियमितताओं और खामियों के कारण पूरे भारत में छात्रों का भविष्य खतरे में है।

अहमदाबाद, 25 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को अहमदाबाद में अपना राष्ट्रव्यापी अभियान “छात्रों की गूंज” शुरू करते हुए आरोप लगाया कि देश की परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही अनियमितताओं और खामियों के कारण पूरे भारत में छात्रों का भविष्य खतरे में है।

40 दिनों तक चलने वाला यह अभियान 28 प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाएगा और इसका उद्देश्य परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, भर्ती में देरी और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के कामकाज को लेकर छात्रों, नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों और युवा समूहों को एकजुट करना है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और विधायक सतेज पाटिल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों ने लाखों छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है।

उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के लिए जिम्मेदार लोगों और राजनीतिक हस्तियों के बीच कथित संबंधों की जांच की मांग की।

पाटिल ने कहा कि भाजपा सरकार की भ्रष्ट नीतियों के कारण कई छात्रों का भविष्य खतरे में है।

उन्होंने इस अभियान को उन छात्रों और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए एक मंच बताया, जिनके प्रयासों को परीक्षा पेपर लीक, रद्द परीक्षाओं, परिणामों में देरी और रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं ने धराशायी कर दिया है।

पाटिल ने आरोप लगाया कि नीट-यूजी विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा बुरी तरह से टूट गया है।

उन्होंने कहा कि छात्र कोई एहसान नहीं मांग रहे हैं। वे केवल निष्पक्ष परीक्षा और तय समय सीमा के भीतर भर्ती की मांग कर रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान, कांग्रेस नेताओं ने गुजरात के काहन पटेल को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कथित तौर पर नीट परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद 'निराश' होकर आत्महत्या कर ली थी।

पार्टी नेताओं ने देश भर में परीक्षा संबंधी तनाव से जुड़ी कई छात्र आत्महत्याओं की खबरों का भी जिक्र किया।

पाटिल ने कहा कि हाल के वर्षों में परीक्षा की प्रतियां लीक होने के 89 से अधिक मामले और परीक्षा घोटाले सामने आए हैं, लेकिन इनके पीछे के किसी बड़े सरगना या गिरोह का पर्दाफाश नहीं हुआ है। जब राष्ट्रीय परीक्षाओं पर भरोसा कम हो रहा है, तो राष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

अहमदाबाद शहर समन्वयक शेष नारायण ओझा ने आरोप लगाया कि पेपर लीक होना अब छिटपुट घटनाओं के बजाय एक नियमित राष्ट्रीय समस्या बन गई है।

पार्टी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में देश में पेपर लीक होने के 89 मामले सामने आए हैं, जिनसे कम से कम 65 लाख उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि लगभग 48 परीक्षाओं को दोबारा आयोजित करना पड़ा, जबकि 22 परीक्षाएं आयोजित होने से पहले ही रद्द कर दी गईं।

--आईएएनएस

एमएस/

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