अहमदाबाद, 25 जून (आईएएनएस)। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए झारखंड के गिरिडीह-जामताड़ा क्षेत्र से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी कथित तौर पर ऐसे खतरनाक एंड्रॉयड एप्लिकेशन पैकेज (एपीके) फाइल तैयार और शेयर करते थे, जिनकी मदद से साइबर अपराधी लोगों के मोबाइल फोन हैक कर उनके बैंक खातों से रकम उड़ा लेते थे।
![]()
अहमदाबाद, 25 जून (आईएएनएस)। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए झारखंड के गिरिडीह-जामताड़ा क्षेत्र से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी कथित तौर पर ऐसे खतरनाक एंड्रॉयड एप्लिकेशन पैकेज (एपीके) फाइल तैयार और शेयर करते थे, जिनकी मदद से साइबर अपराधी लोगों के मोबाइल फोन हैक कर उनके बैंक खातों से रकम उड़ा लेते थे।
गिरफ्तार आरोपियों में गिरिडीह निवासी 28 वर्षीय पूर्णानंद उर्फ मुकेश तिवारी, 33 वर्षीय विकास दास और 26 वर्षीय सीताराम नकुल मंडल शामिल हैं। मुख्य आरोपी मुकेश तिवारी को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की मदद से किशनगंज के पास एक चलती ट्रेन से गिरफ्तार किया गया।
मामले की जांच अहमदाबाद के हंसोल क्षेत्र निवासी नरेश सबनानी की शिकायत के आधार पर शुरू हुई। शिकायतकर्ता को व्हाट्सऐप पर एक संदेश मिला, जिसमें खुद को साबरमती गैस लिमिटेड का प्रतिनिधि बताते हुए गैस कनेक्शन काटे जाने की चेतावनी दी गई थी। संदेश में एक कथित अधिकारी से संपर्क करने और "साबरमती गैस बिल अपडेट.एपीके" नामक एप्लिकेशन डाउनलोड करने को कहा गया।
पुलिस के अनुसार, एप डाउनलोड करने के बाद शिकायतकर्ता का मोबाइल फोन हैक हो गया और उसके एचडीएफसी बैंक खाते से 6.68 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई। पीड़ित ने 1930 साइबर हेल्पलाइन और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जांच शुरू हुई।
साइबर क्राइम ब्रांच की संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. लवीना सिन्हा ने प्रेस वार्ता में बताया कि तकनीकी विश्लेषण और खुफिया जानकारी के आधार पर मुख्य आरोपी तक पहुंच बनाई गई। जांच में पता चला कि मुकेश तिवारी दुर्भावनापूर्ण एपीके फाइलें तैयार करता था और एक टेलीग्राम बॉट के माध्यम से उन्हें देशभर के साइबर अपराधियों को बेचता था।
पुलिस के अनुसार, टेलीग्राम बॉट में कई एपीके विकल्प उपलब्ध थे। इन फर्जी एप्स को एसबीआई केवाईसी, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, यस बैंक, यूनियन बैंक, इंडसइंड बैंक, आरटीओ ई-चालान, बिजली बिल और अन्य सेवाओं के नाम पर तैयार किया जाता था।
जांच में सामने आया कि आरोपी कम से कम 18 बैंकों के नाम पर फर्जी एपीके फाइलें बना चुका था। वह इन फाइलों की मासिक सदस्यता 12,000 रुपये में बेचता था। पुलिस के मुताबिक उसके पास हर महीने 300 से 400 ग्राहक होते थे और इससे वह लगभग 40 से 50 लाख रुपये प्रति माह की कमाई कर रहा था।
विकास दास पर आरोप है कि वह इन एपीके फाइलों को खरीदारों तक पहुंचाने का काम करता था। वह एसबीआई की योनो कैश सुविधा के जरिए भुगतान प्राप्त करता था, जिससे बिना डेबिट कार्ड के एटीएम से नकदी निकाली जा सकती है। पुलिस के अनुसार, वह कमीशन काटकर शेष रकम मुकेश तिवारी तक पहुंचाता था।
वहीं सीताराम मंडल अन्य साइबर अपराधियों को एपीके फाइलें उपलब्ध कराने के साथ-साथ डेबिट और क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारियां जुटाने का काम करता था। पुलिस ने बताया कि मंडल पहले लोगों को फोन कर ओटीपी हासिल करने वाली ठगी में भी शामिल रहा है।
जांच एजेंसियों ने पाया कि ये फर्जी एप गैस बिल अपडेट, बैंक केवाईसी, बिजली बिल, ग्राहक सेवा, सरकारी योजनाओं, ई-चालान और यहां तक कि शादी के निमंत्रण पत्र के रूप में भी भेजे जाते थे। एक बार मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद ये एप एसएमएस, संपर्क सूची, कॉल लॉग, नोटिफिकेशन और बैंकिंग संबंधी जानकारी तक पहुंच हासिल कर लेते थे।
डॉ. सिन्हा ने बताया कि संक्रमित मोबाइल से यह एपीके फाइल स्वतः व्हाट्सऐप और टेलीग्राम समूहों में भी भेजी जाती थी, जिससे यह तेजी से हजारों लोगों तक पहुंच जाती थी।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से विभिन्न बैंकों और संस्थाओं के नाम पर तैयार की गई एपीके फाइलें, डोमेन, सर्वर, ईमेल अकाउंट और अन्य तकनीकी साक्ष्य बरामद किए हैं।
जांच में अब तक इस गिरोह को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 12 शिकायतों और अहमदाबाद में दर्ज पांच एफआईआर से जोड़ा गया है। इन मामलों में करीब 70 लाख रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है। पुलिस का मानना है कि गिरोह की गतिविधियां कई राज्यों तक फैली हुई थीं और मामले की आगे भी जांच जारी है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें, किसी भी अनजान स्रोत से प्राप्त एपीके फाइल इंस्टॉल न करें, ओटीपी या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें और यदि गलती से कोई संदिग्ध एपीके डाउनलोड हो जाए तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें या निकटतम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।
--आईएएनएस
डीएससी
Leave A Reviews