
ग्वालियर। जिले से एक बेहद दुखद और हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ बेलगढ़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम चितौली में धार्मिक माहौल के बीच अचानक चीख-पुकार मच गई। लकेश्वरी माता मंदिर में चल रही भागवत कथा के दौरान श्रद्धा भाव से भजन गा रहे एक 50 वर्षीय किसान को जहरीले सांप ने डंस लिया। अस्पताल में कई घंटों तक चले इलाज के बाद भी किसान की जान नहीं बचाई जा सकी और उन्होंने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
रोज जाते थे कथा सुनने, भजन गाते समय पैर में लिपटा सांप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम चितौली निवासी मदनलाल रावत (50 वर्ष, पिता रामचरण रावत) पेशे से किसान थे और बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। क्षेत्र के प्रसिद्ध लकेश्वरी माता मंदिर परिसर में पिछले एक सप्ताह से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन चल रहा था, जिसमें मदनलाल रोजाना नियमित रूप से शामिल हो रहे थे। वे न केवल कथा सुनते थे, बल्कि मंदिर की मंडली के साथ बैठकर मुख्य रूप से भजन-कीर्तन भी गाते थे।
शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे जब कथा पंडाल श्रद्धालुओं से भरा हुआ था और मदनलाल पूरे मन से भजन गा रहे थे, तभी अचानक अंधेरे या भीड़ का फायदा उठाकर एक जहरीला सांप वहां आ गया और उसने मदनलाल के पैर में डंस लिया।
तबीयत बिगड़ने पर हुआ अहसास, देर रात इलाज के दौरान मौत
शुरुआती कुछ मिनटों तक पंडाल के शोर और कीर्तन की आवाज के कारण मदनलाल और आसपास बैठे लोगों को सांप के काटने का सही अंदाजा नहीं हो पाया। लेकिन कुछ ही देर बाद जब सांप का जहर शरीर में फैलने लगा, तो मदनलाल अचानक बेसुध होने लगे और उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। यह देख वहां मौजूद श्रद्धालुओं और परिजनों में हड़कंप मच गया।
परिजन बिना वक्त गंवाए उन्हें तुरंत गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों की टीम ने एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom) देकर उनका आपातकालीन इलाज शुरू किया। लेकिन सांप अत्यधिक विषैला होने के कारण जहर उनके फेफड़ों और दिल तक पहुंच चुका था। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और देर रात करीब 1:00 बजे उपचार के दौरान मदनलाल ने दम तोड़ दिया।
पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम, गांव में पसरा सन्नाटा
अस्पताल से मिली मेमो सूचना के बाद बेलगढ़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर शव को अपने कब्जे में लिया। शनिवार सुबह डॉक्टरों के पैनल द्वारा शव का पोस्टमार्टम (Post-Mortem) कराया गया, जिसके बाद शव अंतिम संस्कार के लिए रोते-बिलखते परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि मदनलाल बहुत ही सीधे और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि भगवान की भक्ति और धार्मिक आयोजन में लीन रहने वाले इंसान की मौत इस तरह काल के क्रूर झपट्टे से हो जाएगी। घटना के बाद से चितौली गांव और मंदिर परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है।
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