
ग्वालियर जिले के अंतर्गत आने वाले भितरवार नगर से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को शर्मसार करने वाली एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। यहाँ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टरों की कथित संवेदनहीनता और 108 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस की लेती-लतीफी के कारण एक 26 वर्षीय प्रसूता महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी। डिलीवरी के बाद हालत बिगड़ने पर महिला को बिना प्राथमिक उपचार दिए ही गंभीर स्थिति में ग्वालियर रेफर कर दिया गया था, जिसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से मृतक महिला के परिजनों में भारी आक्रोश है और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भितरवार नगर के वार्ड क्रमांक 4 स्थित गड्ढा मोहल्ला के निवासी सोनू परिहार की 26 वर्षीय पत्नी रेणु परिहार को 1 जून सोमवार की सुबह तकरीबन 4 बजे अचानक प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) शुरू हुई। परिजनों ने प्रसूता को तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए 108 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस को कॉल किया। परिजनों का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी एंबुलेंस घंटों तक मौके पर नहीं पहुंची। इस दौरान एंबुलेंस का इंतजार करते-करते महिला का दर्द असहनीय हो गया और अंततः घर पर ही उसकी डिलीवरी करानी पड़ी। रेणु ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया, लेकिन इसके तुरंत बाद ही उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा।
बच्ची के जन्म के बाद जब एंबुलेंस मौके पर पहुंची, तो परिजन आनन-फानन में रेणु को लेकर भितरवार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। उस समय अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक और स्टाफ ने महिला की नाजुक हालत को देखने के बावजूद उसे कोई जीवनरक्षक या प्राथमिक उपचार (First Aid) नहीं दिया। परिजनों का कहना है कि कोई भी डॉक्टर यह बताने को तैयार नहीं था कि महिला की स्थिति इतनी गंभीर क्यों हुई। डॉक्टरों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए महिला को तुरंत ग्वालियर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। बदहवास परिजन उसे लेकर ग्वालियर के लिए रवाना हुए, लेकिन बदकिस्मती से ग्वालियर पहुंचने से पहले ही रास्ते में रेणु की सांसें थम गईं।
इस हृदयविदारक घटना ने एक पूरे परिवार को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। मृतक महिला के पति सोनू परिहार ने रोते हुए डॉक्टरों पर घोर लापरवाही के आरोप लगाए। सोनू ने कहा:
"अगर समय पर एंबुलेंस आ जाती या फिर अस्पताल के डॉक्टरों ने मेरी पत्नी को ग्वालियर रेफर करने से पहले थोड़ा भी इलाज दे दिया होता, तो शायद आज वह जिंदा होती। डॉक्टरों की इस संवेदनहीनता के कारण मेरे चार छोटे-छोटे मासूम बच्चे हमेशा के लिए बिना मां के अनाथ हो गए हैं।"
इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।
इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर हलचल शुरू हो गई है। बिना इलाज किए प्रसूता को ग्वालियर रेफर करने और रास्ते में हुई उसकी मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए भितरवार के खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉक्टर अशोक खरे ने कड़ा रुख अपनाया है। बीएमओ द्वारा घटना के वक्त ड्यूटी पर मौजूद संबंधित चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ को 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी किया गया है। इन सभी को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने की चेतावनी दी गई है। डॉ. खरे ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भी कर्मचारी या डॉक्टर दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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