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हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला: कैबिनेट रैंक और भत्तों में कटौती

शिमला, 17 मार्च (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंगलवार को बताया कि सरकार ने विभिन्न प्राधिकरणों, जिनमें बोर्ड, निगम और आयोगों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और उप-अध्यक्ष, साथ ही प्रधान सलाहकार और राजनीतिक सलाहकार शामिल हैं, को वर्तमान में दिए गए 'कैबिनेट रैंक' का दर्जा वापस लेने का निर्णय लिया है।

शिमला, 17 मार्च (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंगलवार को बताया कि सरकार ने विभिन्न प्राधिकरणों, जिनमें बोर्ड, निगम और आयोगों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और उप-अध्यक्ष, साथ ही प्रधान सलाहकार और राजनीतिक सलाहकार शामिल हैं, को वर्तमान में दिए गए 'कैबिनेट रैंक' का दर्जा वापस लेने का निर्णय लिया है।

सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह फैसला प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करने की कोशिशों के तहत लिया गया है। उन्होंने आगे बताया कि इसके अलावा, संबंधित अधिकारियों की सैलरी और मासिक भत्तों का 20 प्रतिशत हिस्सा 30 सितंबर, 2026 तक रोककर रखा जाएगा।

प्रवक्ता ने कहा कि सभी प्रशासनिक सचिवों को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने के लिए जरूरी निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

इस बीच, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में उच्च शिक्षा में सुधारों पर आयोजित एक दिवसीय प्रधानाचार्य सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों के बजट में कोई कटौती नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षा राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और छात्रों को, यहां तक कि दूर-दराज के इलाकों में भी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

सुक्खू ने कहा, "आत्मविश्वास बढ़ाना बेहद जरूरी है ताकि छात्र भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें; इसमें शिक्षकों और शिक्षा की भूमिका अहम है।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए कई पहल की हैं।

उन्होंने विज्ञान, वाणिज्य और ललित कला जैसे नए विशेष कॉलेजों को खोलने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि हमीरपुर में 50 बीघा जमीन पर एक विज्ञान कॉलेज बनाया जा रहा है, और राज्य सरकार ने इस कॉलेज के लिए 20 करोड़ रुपए जारी किए हैं। इसके अलावा, पूरे राज्य में वाणिज्य और अन्य विशेष कॉलेज भी खोले जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उच्च शिक्षा में मौजूदा कमियों को दूर करने और सार्थक सुधार लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर के 400 पदों और जूनियर असिस्टेंट प्रोफेसर के 400 पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रियाएं चल रही हैं। उन्होंने कॉलेजों में छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए नए जमाने के कोर्स और अतिरिक्त भाषा कार्यक्रम शुरू करने के भी निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए, स्कूलों की रैंकिंग की तर्ज पर कॉलेजों के लिए भी एक रैंकिंग प्रणाली शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र भी सरकार की एक अहम प्राथमिकता है, और इस क्षेत्र में भी सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयासों की वजह से, मेडिकल कॉलेजों में अत्याधुनिक एमआरआई मशीनें लगाई गई हैं, और रोबोटिक सर्जरी को लेकर मिली प्रतिक्रिया काफी उत्साहजनक रही है। उन्होंने कहा कि राज्य को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बंद कर दिया गया है, और 1,600 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता देने से इनकार कर दिया गया है; इसका कारण सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लागू करना बताया गया है।

उन्होंने जोर देकर कहा, "ओपीएस कोई राजनीतिक मकसद से लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि यह राज्य सरकार की अपने कर्मचारियों को बुढ़ापे में सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्धता थी।"

--आईएएनएस

एससीएच

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