
जबलपुर। मध्य प्रदेश के चिकित्सा इतिहास में संस्कारधानी जबलपुर ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। शहर के अपोलो हॉस्पिटल्स में राज्य की पहली सफल 'रोबोटिक प्रोस्टेट सर्जरी' को अंजाम दिया गया है। इस तकनीकी छलांग के साथ ही अब मध्य प्रदेश के प्रोस्टेट कैंसर पीड़ितों को विश्वस्तरीय इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई या अन्य महानगरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
यह ऐतिहासिक सर्जरी सुप्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट और रोबोटिक यूरो सर्जन डॉ. प्रणल सहारे के नेतृत्व में संपन्न हुई। इस उपलब्धि की जानकारी एक प्रेसवार्ता के दौरान दी गई, जिसमें डॉ. प्रणल सहारे के साथ वरिष्ठ सर्जन डॉ. गणेश गोस्वामी, अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. शोभित बड़ेरिया, सीईओ डॉ. पुनीत मेहता और बिजनेस हेड निलेश रावल भी उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार, रोबोटिक प्रोस्टेट सर्जरी आधुनिक चिकित्सा की 'मिनिमल इनवेसिव' (न्यूनतम चीरा-फाड़) पद्धति है। इसकी विशेषताएं इसे पारंपरिक पद्धति से कहीं अधिक प्रभावी बनाती हैं:
छोटा चीरा, कम दर्द: पारंपरिक सर्जरी में जहाँ 15-20 सेमी का बड़ा कट लगाना पड़ता था, वहीं रोबोटिक तकनीक में मात्र 1 से 2 सेंटीमीटर के छोटे छिद्रों से ऑपरेशन हो जाता है।
सटीकता और सुरक्षा: सर्जन को आंतरिक अंगों का 3D और स्पष्ट दृश्य मिलता है, जिससे प्रोस्टेट के पास की नाजुक नसों को नुकसान नहीं पहुँचता। इससे सर्जरी के बाद मरीज के पेशाब नियंत्रण और यौन क्षमता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता।
रक्तस्राव और संक्रमण का कम खतरा: छोटे कट के कारण खून का बहाव न्यूनतम होता है और संक्रमण की आशंका लगभग समाप्त हो जाती है।
मरीजों के लिए यह तकनीक समय और सेहत दोनों के लिहाज से वरदान है। जहाँ सामान्य सर्जरी के बाद 10 दिन तक अस्पताल में रहना पड़ता था, वहीं रोबोटिक विधि से मरीज को 3 से 5 दिन में छुट्टी मिल जाती है। पूर्ण रिकवरी का समय भी 8 सप्ताह से घटकर मात्र 2 से 3 सप्ताह रह गया है।
इस सफलता के पीछे डॉ. प्रणल सहारे का 10 वर्षों का गहन अनुभव और डॉ. गणेश गोस्वामी (जिनके पास यूके और यूरोप का दो दशकों का अनुभव है) का मार्गदर्शन रहा है। अपोलो हॉस्पिटल्स अब न केवल रोबोटिक सर्जरी, बल्कि किडनी ट्रांसप्लांट और जटिल लैप्रोस्कोपिक उपचारों के लिए भी प्रदेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
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