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पांढुर्णा सिविल अस्पताल में मानवता शर्मसार: घायल तड़पता रहा और डॉक्टर बोले- 'हम किसी के बाप के नौकर नहीं'

पांढुर्णा. जिला पांढुर्णा के सिविल अस्पताल की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक को समय पर इलाज न मिलने और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर की अभद्रता का मामला सामने आया है। अस्पताल में इलाज के अभाव में घायल युवक एक घंटे तक तड़पता रहा, जिसके बाद परिजनों को उसे गंभीर हालत में नागपुर ले जाना पड़ा। इस दौरान डॉक्टर और परिजनों के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

गड्ढे के कारण हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, सागर देशमुख (निवासी सिवनी) अपनी बाइक से सौंसर की ओर जा रहे थे। सिवनी के पास सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे के कारण उनकी बाइक अनियंत्रित होकर उछल गई और वे सड़क पर गिर पड़े। इस हादसे में सागर गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका एक हाथ बुरी तरह चोटिल हो गया।

घायल सागर ने मदद के लिए अपने मित्रों प्रशांत महुळकर और आकाश खन्ना को फोन किया। दोनों मित्र उन्हें लेकर शाम करीब 6:00 बजे पांढुर्णा के सिविल अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि ड्यूटी पर डॉक्टर अभिजीत गजभिये तैनात हैं, जो उस वक्त पहली मंजिल पर थे।

एक घंटे तक नहीं आए डॉक्टर, हुई तीखी बहस

परिजनों का आरोप है कि घायल की बिगड़ती हालत को देख वे लगातार डॉक्टर को बुलाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन करीब एक घंटे तक डॉक्टर नीचे नहीं आए। समय पर प्राथमिक उपचार न मिलता देख प्रशांत महुळकर ने जोखिम उठाते हुए घायल सागर को निजी वाहन से नागपुर ले जाने का फैसला किया।

जब डॉक्टर अस्पताल के वार्ड में पहुंचे, तो घायल के साथियों ने उनसे ड्यूटी के दौरान अनुपस्थिति को लेकर सवाल किया। इस पर डॉक्टर अपना आपा खो बैठे और बहस के दौरान कथित रूप से अपशब्दों का प्रयोग करते हुए कहा, "हम किसी के बाप के नौकर नहीं हैं।"

जनता में आक्रोश, जांच की मांग

डॉक्टर के इस असंवेदनशील व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब अस्पताल में मरीजों की जान दांव पर लगी हो, तब ऐसी लापरवाही और बदतमीजी स्वीकार्य नहीं है।

"अस्पताल की व्यवस्थाएं और डॉक्टरों का ऐसा व्यवहार मरीजों के विश्वास को तोड़ता है। इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।" - स्थानीय नागरिक

अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस वायरल वीडियो और डॉक्टर के व्यवहार को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों के खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।

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