
बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के दौरान भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के संकेत देखने को मिले हैं। मंगलवार को भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई।
यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन के रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर आयोजित की गई, जिसमें दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आपसी सहयोग और एशिया में स्थिरता बनाए रखने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही सीमा क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और तनाव कम करने के लिए प्रभावी संचार तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि इस बातचीत से उन्हें खुशी हुई और यह संवाद आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। रक्षा विशेषज्ञों ने इस मुलाकात को सकारात्मक और रचनात्मक करार दिया है, जो दोनों देशों के बीच भरोसा बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इससे पहले राजनाथ सिंह ने बिश्केक स्थित विक्ट्री स्क्वायर पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और वीर सैनिकों के बलिदान को नमन किया। अपने दौरे के दौरान वह अन्य एससीओ सदस्य देशों के प्रतिनिधियों और किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे।
गौरतलब है कि भारत और चीन के संबंध वर्ष 2020 में गलवान घाटी झड़प के बाद काफी तनावपूर्ण हो गए थे। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच विश्वास में कमी आई थी, हालांकि पिछले कुछ समय से संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्चस्तरीय बैठकों से न केवल क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलता है, बल्कि भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच संवाद के नए रास्ते भी खुलते हैं। आने वाले समय में इस बातचीत के ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद की जा रही है।
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