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सतना में बेल का शरबत पीने के बाद बिगड़ी 4 लोगों की तबीयत, 7 वर्षीय मासूम की मौत, 3 अस्पताल में भर्ती


सतना जिले के उचेहरा ब्लॉक से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां की ग्राम पंचायत परसमनिया में संदिग्ध खाद्य विषाक्तता (फूड पॉइजनिंग) के चलते एक 7 वर्षीय मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि परिवार के तीन अन्य सदस्य गंभीर रूप से बीमार हो गए। मृतक बच्चे की पहचान किशुन दहिया के रूप में हुई है। घटना के बाद से पूरे परसमनिया गांव में दहशत और मातम का माहौल है। बीमार सदस्यों का फिलहाल एक निजी नर्सिंग होम में इलाज चल रहा है, जहां उनकी हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

खाना खाने के बाद पिया था बेल का शरबत परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को पूरे परिवार ने रात के भोजन में रोटी और करेले की सब्जी खाई थी। खाना खाने के कुछ देर बाद सभी सदस्यों ने बेल (पत्थर बेल) का शरबत पिया। शरबत पीने के महज कुछ ही समय बाद एक-एक कर परिवार के सभी लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं और पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई। जब हालत बेहद गंभीर हो गई, तो ग्रामीणों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया जाने लगा, लेकिन बदकिस्मती से अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में 7 वर्षीय मासूम किशुन दहिया ने दम तोड़ दिया।

परिवार के तीन सदस्य अब भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे इस दर्दनाक हादसे में परिवार के तीन अन्य सदस्य भी गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। बीमार होने वालों में शिवम दहिया (12 वर्ष), बाबूलाल दाहिया (65 वर्ष) और शांति बाई (55 वर्ष) शामिल हैं। तीनों को तत्काल मैहर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां उनका गहन उपचार जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक, बुजुर्ग और बच्चों पर फूड पॉइजनिंग का असर बहुत तेजी से हुआ है, लेकिन फिलहाल उनकी स्थिति को स्थिर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पीएचई विभाग ने पानी को दी क्लीनचिट, कुआं सुरक्षित शुरुआत में ग्रामीणों को आशंका थी कि गांव या घर के कुएं में दूषित पानी की वजह से यह बीमारी फैली है। इस आशंका को देखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) की टीम तुरंत हरकत में आई और बाबूलाल दाहिया के घर के कुएं के पानी के सैंपल लिए। पीएचई उपसंभाग मैहर द्वारा जारी जांच रिपोर्ट में पानी को पूरी तरह सुरक्षित पाया गया है। पानी में ई-कोलाई (E. coli) और टोटल कॉलिफॉर्म जैसे हानिकारक बैक्टीरिया नहीं मिले हैं, और पानी के सभी भौतिक व रासायनिक मानक सामान्य सीमा के भीतर पाए गए हैं।

करेले में कीटनाशक (पेस्टिसाइड) होने की आशंका पानी की रिपोर्ट में क्लीनचिट मिलने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग का पूरा ध्यान खाद्य विषाक्तता (फूड पॉइजनिंग) पर केंद्रित हो गया है। स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि परिवार ने जो करेला खाया था, संभवतः उस पर अत्यधिक मात्रा में कीटनाशक (पेस्टिसाइड) का छिड़काव किया गया था और उसे बिना ठीक से धोए पका लिया गया। कीटनाशक युक्त सब्जी और उसके बाद बेल के शरबत के कॉम्बिनेशन ने पेट में जाकर जहरीला रूप ले लिया। फिलहाल स्वास्थ्य और पुलिस प्रशासन मामले की विस्तृत जांच कर रहा है ताकि मौत के सटीक कारणों को स्पष्ट किया जा सके।

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