Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

इन देशभक्ति गीतों से मनाएं आजादी का पर्व, हर दिल में जगेगा राष्ट्रप्रेम


मुंबई, 15 अगस्त (आईएएनएस)। स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि उन असंख्य वीर सपूतों के बलिदान का प्रतीक है, जिनके संघर्ष से हमें आजादी मिली थी। हर साल इस अवसर पर देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत गीत वातावरण में नई ऊर्जा और उत्साह भर देते हैं। ये गीत देश की एकता, अखंडता और शान का संदेश देते हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हम आपको ऐसे ही कुछ ऐसे गानों के बारे में बताएंगे, जो आपको राष्ट्र के गौरव, एकता और जिम्मेदार नागरिक होने का संदेश भी देते हैं।

मुंबई, 15 अगस्त (आईएएनएस)। स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि उन असंख्य वीर सपूतों के बलिदान का प्रतीक है, जिनके संघर्ष से हमें आजादी मिली थी। हर साल इस अवसर पर देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत गीत वातावरण में नई ऊर्जा और उत्साह भर देते हैं। ये गीत देश की एकता, अखंडता और शान का संदेश देते हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हम आपको ऐसे ही कुछ ऐसे गानों के बारे में बताएंगे, जो आपको राष्ट्र के गौरव, एकता और जिम्मेदार नागरिक होने का संदेश भी देते हैं।

1. हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के इस देश को रखना - यह प्रसिद्ध गीत फिल्म जागृति का एक अमर गीत है, जिसे गीतकार प्रदीप ने लिखा और संगीत हेमंत कुमार ने दिया था। इसे मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई आवाज से गाया था। यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के भारी बलिदानों को याद दिलाता है। साथ ही, देश के बच्चों और युवाओं को देश का भविष्य बताया गया है और उनसे आग्रह किया गया है कि वे इस देश की एकता, अखंडता, और इसकी आजादी की रक्षा पूरी सावधानी से करें।

2. विजयी विश्व तिरंगा प्यारा- इस अमर गीत की रचना महान स्वतंत्रता सेनानी और कवि श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' ने की थी। इस गीत की खासियत है कि इसका पहली बार गायन सार्वजनिक तौर पर 13 अप्रैल 1924 को कानपुर के फूलबाग में जलियांवाला बाग स्मृति दिवस के अवसर पर किया गया था, जहां पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए प्रेरणा का मुख्य स्रोत था और इसे गाकर युवा देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने को तैयार हो जाते थे।

3. ऐ मेरे वतन के लोगों - इस प्रसिद्ध को महान कवि कवि प्रदीप ने लिखा था, सी. रामचंद्र ने संगीतबद्ध किया था और स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। 1962 के भारत-चीन युद्ध में देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले वीर सैनिकों को समर्पित गीत की प्रस्तुती पहली बार लता मंगेश्कर ने 27 जनवरी 1963 को नई दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में गणतंत्र दिवस के अवसर पर की थी। इस दौरान मंच पर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन मौजूद थे। गौरतलब यह है कि लता मंगेशकर ने गाने के इस कदर गाया था कि इसे सुनकर पंडित जवाहरलाल नेहरू की आंखें नम हो गई थीं।

4. सारे जहां से अच्छा- यह गीत औपचारिक रूप से ‘तराना-ए-हिन्दी’ प्रसिद्ध शायर अल्लामा मुहम्मद इकबाल द्वारा 1904 में लिखी गई एक ऐतिहासिक देशभक्ति कविता है। बताया जाता है कि अल्लामा मुहम्मद इकबाल इसे पहली बार लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज में सुनाया था। यह प्रसिद्ध गीत भारतीय सशस्त्र बलों के बैंड द्वारा ‘क्विक मार्च' के रूप में बजाया जाता है। इस गीत की प्रसिद्ध पंक्ति "मजबह नहीं सिखाता आपस में बैर रखना" भारत की विविधता में एकता का संदेश देती है।

5. पगड़ी संभाल जट्टा - यह गीत मूल रूप से ब्रिटिश शासन के समय 1907 में पंजाब के किसानों द्वारा शुरू किए गए ऐतिहासिक किसान आंदोलन का लोकप्रिय नारा और प्रेरणादायक लोकगीत है। यह गीत किसानों के आत्म-सम्मान और अंग्रेजी दमन के खिलाफ उठी क्रांति की आवाज थी।

6. मंगल मंगल मंगल मंगल मंगल हो - यह गाना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले सेनानी शहीद मंगल पांडे के शौर्य, क्रांति और देशप्रेम की भावना को समर्पित है, जिसके बोल "जागो मंगल मंगल... मंगल मंगल हो" के रूप में जोश भरते हैं। कैलाश खेर ने अपनी बुलंद आवाज में गाने को गाया था, जबकि ए.आर. रहमान ने इसका संगीत तैयार किया था और जावेद अख्तर ने इसके लिरिक्स लिखे थे।

7. देश मेरे देश मेरे मेरी जान है तू- इस गीत को फिल्म 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' में फिल्माया गया था, जो अपने बोल से स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, उनके अटूट साहस और देश के लिए जान न्योछावर करने की भावना को परदे पर जीवंत करता है। ए.आर. रहमान का संगीत और सुखविंदर सिंह की जोशीली आवाज इस गाने में देशभक्ति का ऐसा प्रभाव पैदा करती है।

8. मेरा रंग दे बसंती चोला - इस लोकप्रिय गीत का गहरा संबंध शहीद भगत सिंह और महान क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल से है, जो देश के लिए बलिदान और साहस का प्रतीक माना जाता है। इस अमर गीत की मूल पंक्तियां और तुकबंदी 1927 में महान क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल और उनके साथियों ने गोरखपुर जेल में काकोरी षड्यंत्र मामले के दौरान रची थीं। 'बसंती चोला' का अर्थ केसरिया रंग के वस्त्रों से है, जो बलिदान, शौर्य और देशभक्ति का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि भगत सिंह और उनके साथियों ने इसे अपने जीवन के अंतिम क्षणों में गाया था।

9. विजयी भव (मणिकर्णिका) - 'विजयी भव' फिल्म 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' का एक देशभक्ति और जोश से भरा युद्ध गान (वॉर एंथम) है। इसे शंकर-एहसान-लॉय ने संगीतबद्ध किया है, प्रसून जोशी ने लिखा है और शंकर महादेवन ने अपनी दमदार आवाज दी है। इस गाने में कंगना रनौत (रानी लक्ष्मीबाई) को तलवारबाजी का प्रशिक्षण लेते और सेना का नेतृत्व करते दिखाया गया है।

10. एकला चलो - 'एकला चलो रे' गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित एक अत्यंत लोकप्रिय और प्रेरणादायक बंगाली देशभक्ति गीत है, जिसे सन 1905 में लिखा गया था। इसका मुख्य संदेश यह है कि यदि कोई भी आपका साथ न दे या आपकी पुकार न सुने, तब भी आपको अपने सत्य और कर्तव्य के पथ पर अकेले ही आगे बढ़ते रहना चाहिए।

--आईएएनएस

एनएस/वीसी

Share:

Leave A Reviews

Related News