
नई दिल्ली। भारत ने मालदीव की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए 30 अरब रुपये (लगभग 320 मिलियन डॉलर) की पहली किस्त को मंजूरी दे दी है। यह वित्तीय सहायता सार्क मुद्रा अदला-बदली (SAARC Currency Swap) ढांचे के तहत प्रदान की जा रही है। मालदीव में स्थित भारतीय उच्चायोग ने गुरुवार को इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि यह कदम द्वीप राष्ट्र की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस सहायता का आधार अक्टूबर 2024 में रखा गया था, जब मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की नई दिल्ली की राजकीय यात्रा के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और मालदीव सरकार के बीच मुद्रा अदला-बदली व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए गए थे। उल्लेखनीय है कि मालदीव द्वारा इसी ढांचे के तहत अक्टूबर 2024 में ली गई 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की निकासी की अवधि गुरुवार को पूरी (परिपक्व) हो गई, जिसके ठीक बाद नई किस्त को हरी झंडी दिखाई गई है।
मालदीव के विदेश मंत्रालय ने इस सहयोग का स्वागत करते हुए कहा कि 400 मिलियन डॉलर की सुविधा का समय पर निपटान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मंत्रालय के अनुसार, 2012 में सार्क स्वैप फ्रेमवर्क की शुरुआत के बाद से अब तक भारतीय रिजर्व बैंक ने मालदीव को कुल 1.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का समर्थन प्रदान किया है। यह राशि मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।
भारतीय दूतावास ने जोर देकर कहा कि मालदीव भारत की 'पड़ोसी पहले' (Neighbourhood First) नीति और 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) विजन के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण भागीदार है। बयान में कहा गया कि एक भरोसेमंद पड़ोसी के रूप में भारत हमेशा मालदीव के लिए 'प्रथम सहायता प्रदाता' (First Responder) रहा है। पिछले वर्ष भी, भारत ने मालदीव के अनुरोध पर 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रेजरी बिलों को रोलओवर कर आपातकालीन वित्तीय राहत प्रदान की थी।
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