
इंदौर के एरोड्रम पुलिस थाने में शुक्रवार रात उस समय भीषण तनाव और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई, जब भाजपा कार्यकर्ता पं. जयदीप दुबे और उनके बहनोई व भाजपा मंडल उपाध्यक्ष पंकज चौबे के साथ थाने के भीतर बर्बरतापूर्वक मारपीट और घसीटने का गंभीर मामला सामने आया। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक गोलू शुक्ला के 400 से अधिक आक्रोशित समर्थक थाने पहुंच गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ उग्र नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। रात में करीब 12 घंटे चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप किया।
पीड़ित जयदीप दुबे के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे घर के पास स्कूटी का अचानक ब्रेक लगाने की मामूली बात पर एक युवक ने उनके साथ गाली-गलौज व मारपीट की थी। बीच-बचाव करने पहुंचीं उनकी पत्नी व बच्चों के साथ भी अभद्रता और छेड़छाड़ की गई। जब वे इस मामले की प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने एरोड्रम थाने पहुंचे, तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय टालमटोल किया। दुबे ने सीने में तेज दर्द की शिकायत भी की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। रात 11 बजे जब वे अपने बहनोई पंकज चौबे के साथ पुनः थाने पहुंचे, तो आरोप है कि टीआई वेदेंद्र सिंह कुशवाह ने उन पर विधायकों से फोन लगवाकर नेतागीरी करने का ताना कसा। इसके बाद टीआई और अन्य पुलिसकर्मियों ने लात-घूंसों व डंडों से उनकी जमकर पिटाई कर दी, जो थाने के सीसीटीवी में भी कैद हुई बताई जा रही है।
जयदीप दुबे की पत्नी रानू दुबे ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट लिखाने के दौरान पुलिस अधिकारी उनसे अमर्यादित सवाल पूछ रहे थे कि क्या वे शराब पीते हैं। विरोध करने पर पुलिसकर्मियों ने बदसलूकी की। आरोप है कि टीआई ने अशोभनीय व्यवहार करते हुए धक्का दिया। इस अमानवीय व्यवहार और थाने में हुई मारपीट की खबर जैसे ही फैली, भाजपा कार्यकर्ताओं और विधायक समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा और देर रात 1 बजे सैकड़ों लोगों ने थाने का घेराव कर मुख्य द्वार जाम कर दिया।
थाने में विस्फोटक होती स्थिति को संभालने के लिए एडिशनल डीसीपी सुमित केरकट्टा और एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों से लंबी बातचीत की। मामले की गंभीरता और प्राथमिक दृष्ट्या अनियमितता को देखते हुए एडिशनल डीसीपी ने देर रात एरोड्रम थाना प्रभारी (टीआई) वेदेंद्र सिंह कुशवाह सहित सात पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए। इसके बाद सुबह करीब 5 बजे जाकर विरोध प्रदर्शन समाप्त हुआ। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच एसीपी मल्हारगंज को सौंप दी गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगामी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
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