
तेहरान/इस्लामाबाद. ईरान और अमेरिका के बीच कल यानी शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली अहम बैठक पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. ईरानी मीडिया आउटलेट 'फार्स न्यूज' के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक लेबनान में इजरायली हमले नहीं रुकते और पूर्ण युद्धविराम (Ceasefire) लागू नहीं होता, तब तक वह अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की डील या बातचीत में शामिल नहीं होगा.
विवाद की मुख्य वजह: लेबनान पर भ्रम
हाल ही में पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी. पाकिस्तान का दावा था कि इस सीजफायर में लेबनान भी शामिल है, लेकिन अमेरिका और इजरायल ने इससे साफ इनकार कर दिया. इसके तुरंत बाद लेबनान पर हुए भीषण हमलों ने ईरान को नाराज कर दिया है. ईरान का कहना है कि लेबनान को छोड़कर कोई भी क्षेत्रीय समझौता उसे मंजूर नहीं है.
ईरानी डेलिगेशन की खबरों का खंडन
इससे पहले अमेरिकी मीडिया (WSJ) ने दावा किया था कि ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पाकिस्तान पहुंच चुके हैं. हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय और फार्स न्यूज ने इन खबरों को 'फेक न्यूज़' बताते हुए खारिज कर दिया. ईरान ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तानी अधिकारियों को सूचित कर दिया है कि वे शनिवार की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे.
पाकिस्तान की भूमिका और अमेरिका की तैयारी
पाकिस्तान इस पूरे विवाद में मुख्य मध्यस्थ के रूप में उभरा है, लेकिन लेबनान मसले पर 'गलत संवाद' (Miscommunication) के कारण उसकी स्थिति असहज हो गई है. दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) के नेतृत्व में एक डेलिगेशन के आज इस्लामाबाद पहुंचने की उम्मीद है, ताकि शनिवार को होने वाली प्रस्तावित वार्ता को अंतिम रूप दिया जा सके.
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