
जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित अंजुमन इस्लामिया स्कूल प्रबंधन एक बार फिर बड़े विवाद के घेरे में आ गया है। मध्य प्रदेश शासन (MP Government) द्वारा महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर पूरे राज्य में सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) घोषित किए जाने के बावजूद, अंजुमन स्कूल और उसकी अन्य शाखाओं को आम दिनों की तरह संचालित किया गया। इस बात की जानकारी मिलते ही दक्षिणपंथी संगठनों और राजनीतिक गलियारों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, जिसके बाद शहर का माहौल गरमा गया।
मामला तब तूल पकड़ा जब भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महामंत्री मुज़म्मिल अली ने इस मनमानी का खुलकर विरोध किया और जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को इसकी लिखित व मौखिक सूचना दी।
मुज़म्मिल अली का आरोप है कि जब पूरे मध्य प्रदेश में शासकीय आदेश के तहत सभी स्कूल-कॉलेज और दफ्तर बंद हैं, तो अंजुमन स्कूल प्रबंधन किस अधिकार के तहत सरकारी आदेशों की धज्जी उड़ाकर स्कूल का संचालन कर रहा है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय नायकों के अपमान से भी जोड़कर देखा।
जब इस पूरे मामले पर स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा गया, तो उनकी तरफ से आए तर्क ने विवाद की आग में घी डालने का काम किया। स्कूल प्रबंधन का कहना था कि:
"यह संस्था वक्फ़ बोर्ड के अंतर्गत आती है, इसलिए वे केवल वक्फ़ कानून (Waqf Law) के तहत कैलेंडर में घोषित अनिवार्य अवकाशों का ही पालन करने के लिए बाध्य हैं।"
प्रबंधन की इस दलील के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर विवाद और ज्यादा गहरा गया। लोगों ने सवाल उठाए कि क्या कोई भी निजी या अल्पसंख्यक संस्थान राज्य सरकार के मुख्य सार्वजनिक अवकाश के नियमों से ऊपर हो सकता है।
प्रशासनिक दखल और भाजपा नेताओं के बढ़ते दबाव व विरोध को देखते हुए अंजुमन स्कूल प्रबंधन को आखिरकार बैकफुट पर आना पड़ा। आनन-फानन में अपनी गलती को सुधारते हुए स्कूल प्रबंधन ने बच्चों के अभिभावकों (Parents) के मोबाइल पर एक आधिकारिक संदेश (Message) भेजा, जिसमें अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से स्कूल में छुट्टी की घोषणा कर दी गई।
भले ही स्कूल ने देर से छुट्टी का ऐलान कर दिया हो, लेकिन 'वक्फ़ कानून' की आड़ लेकर सरकारी छुट्टी न देने का यह अजीबोगरीब मामला अब पूरे संस्कारधानी (जबलपुर) में तीखी चर्चा और जांच का विषय बना हुआ है।
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