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जल शक्ति मंत्री पाटिल ने असम की सिंचाई परियोजनाओं पर अध्ययनों की समीक्षा की


नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को बाह्य वित्तपोषित परियोजनाओं में विस्तारित भूमिका की समीक्षा की। जिनकी समीक्षा की गई उनमें असम में सतत सिंचाई विकास, ब्रह्मपुत्र नदी के जलमार्ग परिवर्तन के आर्थिक प्रभाव और उत्तर पूर्वी भारत में जल प्रबंधन पद्धतियों पर अध्ययन शामिल थे।

नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को बाह्य वित्तपोषित परियोजनाओं में विस्तारित भूमिका की समीक्षा की। जिनकी समीक्षा की गई उनमें असम में सतत सिंचाई विकास, ब्रह्मपुत्र नदी के जलमार्ग परिवर्तन के आर्थिक प्रभाव और उत्तर पूर्वी भारत में जल प्रबंधन पद्धतियों पर अध्ययन शामिल थे।

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग के अंतर्गत आने वाले उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (नेरीवालम) के शासी निकाय की छठी बैठक में बोलते हुए पाटिल ने वैज्ञानिक जल प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने उत्तर पूर्वी क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए क्षमता निर्माण और राज्य की अधिक भागीदारी पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने जल एवं भूमि प्रबंधन में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में नेरीवालम की भूमिका को मजबूत करने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया।

एक प्रमुख एजेंडा आइटम में क्षेत्र में सिंचाई प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, क्षेत्र प्रदर्शन और प्रसार को बढ़ावा देने के लिए एक सिंचाई क्षेत्र प्रयोगशाला और प्रदर्शन फार्म स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल था।

शासी निकाय ने एमटेक और पीएचडी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति सहायता, संकाय विकास, अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ करने और जल संसाधन प्रबंधन में जलवायु और जीआईएस-आधारित अनुप्रयोगों में अध्ययन को आगे बढ़ाने संबंधी सिफारिशों पर भी चर्चा की।

इसके अलावा, बैठक में ब्रह्मपुत्र घाटी में कटाव से प्रभावित परिवारों द्वारा सामना की जा रही आजीविका संबंधी चुनौतियों पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन के निष्कर्षों की समीक्षा की गई और विस्थापित समुदायों के लिए स्थायी पुनर्वास और आजीविका संबंधी हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया गया।

शासी निकाय ने संस्थान की उपलब्धियों की समीक्षा की, प्रमुख संस्थागत मामलों को मंजूरी दी और उत्तर पूर्वी क्षेत्र में जल और भूमि प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

शासी निकाय ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षित खातों को मंजूरी दी और क्षमता निर्माण, अनुसंधान और शैक्षणिक गतिविधियों में नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर एंड लैंड मैनेजमेंट (एनईआरआईडब्ल्यूएएलएम) की निरंतर प्रगति की सराहना की।

--आईएएनएस

एमएस/

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