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जम्मू-कश्मीर के कठुआ में खाई में गिरी मिनीबस, 23 श्रद्धालु घायल, दो की हालत गंभीर


जम्मू, 24 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में बुधवार को एक सड़क हादसे में कम से कम 23 श्रद्धालु घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से दो श्रद्धालुओं की हालत गंभीर बताई जा रही है।

जम्मू, 24 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में बुधवार को एक सड़क हादसे में कम से कम 23 श्रद्धालु घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से दो श्रद्धालुओं की हालत गंभीर बताई जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि बिलावर कस्बे के निकट स्थित प्रसिद्ध सुकराला माता मंदिर जा रही श्रद्धालुओं से भरी एक मिनीबस सिम्बली क्षेत्र में नियंत्रण खोने के बाद गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के समय बस मंदिर की ओर जा रही थी।

अधिकारियों के मुताबिक, चालक के नियंत्रण खोने के बाद यह दुर्घटना हुई। हादसे में घायल सभी श्रद्धालुओं को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि दो श्रद्धालुओं को गंभीर चोटें आई हैं और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

अधिकारियों ने बताया, “बचाव अभियान पुलिस, नागरिक प्रशासन और स्थानीय लोगों ने संयुक्त रूप से चलाया। दुर्घटना की सूचना मिलते ही सभी राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच गए और घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।”

उन्होंने कहा कि पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है, ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

सुकराला माता मंदिर कठुआ जिले के बिलावर क्षेत्र के निकट स्थित एक अत्यंत श्रद्धेय हिंदू तीर्थस्थल है। यह मंदिर देवी माल देवी को समर्पित है, जिन्हें शारदा देवी का अवतार माना जाता है। लगभग 3,500 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित सफेद गुंबद वाला यह मंदिर विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

मंदिर में देवी की पूजा पीतल के सिंह पर विराजमान एक पवित्र शिला के रूप में की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी को माता वैष्णो देवी की बड़ी बहन माना जाता है।

स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना हिमाचल प्रदेश के चंबा के निर्वासित राजकुमार मदहो सिंह ने कराई थी।

यह मंदिर जम्मू से लगभग 125 किलोमीटर और कठुआ शहर से करीब 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी के आधार से सीढ़ियों का लंबा मार्ग तय करना पड़ता है।

मंदिर में वर्षभर विभिन्न धार्मिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं, जिनमें चैत्र नवरात्रि और अश्विन नवरात्रि (शारदीय नवरात्रि) विशेष महत्व रखते हैं। इन अवसरों पर मंदिर को आकर्षक सजावट से सजाया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना कर देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

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