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जापान के ‘अमैत्रीपूर्ण रुख’ से समझौते मुश्किल: क्रेमलिन

मॉस्को, 20 फरवरी (आईएएनएस)। रूस ने कहा है कि जापान का मौजूदा रुख अमैत्रीपूर्ण है, ऐसे में दोनों देशों के बीच किसी समझौते की संभावना बेहद कम है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने शुक्रवार को यह बयान दिया।

मॉस्को, 20 फरवरी (आईएएनएस)। रूस ने कहा है कि जापान का मौजूदा रुख अमैत्रीपूर्ण है, ऐसे में दोनों देशों के बीच किसी समझौते की संभावना बेहद कम है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने शुक्रवार को यह बयान दिया।

समाचार एजेंसी के अनुसार पेसकोव ने कहा, “टोक्यो हमारे देश के प्रति अमैत्रीपूर्ण रुख अपना रहा है। इन परिस्थितियों में, जब तक हमारे संबंधों के तौर-तरीकों में बदलाव नहीं होता, किसी भी समझौते तक पहुंचना मुश्किल है।”

इससे पहले जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संसद के निचले सदन में नीति भाषण के दौरान कहा था कि तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के बावजूद जापान, रूस के साथ शांति संधि करना चाहता है।

रूस और जापान के बीच द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक औपचारिक शांति संधि नहीं हो सकी है, जिसके कारण दोनों देशों के रिश्तों पर लंबे समय से असर पड़ा है। यूक्रेन मुद्दे पर जापान द्वारा रूस के खिलाफ कई दौर के प्रतिबंध लगाए जाने के बाद 21 मार्च 2022 को रूसी विदेश मंत्रालय ने टोक्यो के साथ शांति संधि वार्ता निलंबित करने की घोषणा की थी।

इधर, साउथ कोरिया ने जापान द्वारा दोनों देशों के बीच स्थित द्वीपों पर दोबारा क्षेत्रीय दावा किए जाने का कड़ा विरोध जताया है। इन द्वीपों को दक्षिण कोरिया में ‘डोक्डो’ और जापान में ‘ताकेशिमा’ कहा जाता है।

दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वह जापान के विदेश मंत्री द्वारा संसद (डाइट) में दिए गए विदेश नीति भाषण में डोक्डो पर किए गए “अनुचित क्षेत्रीय दावों” का सख्त विरोध करता है। मंत्रालय ने जापान से ऐसे दावों को तत्काल वापस लेने की मांग की।

बयान में स्पष्ट किया गया कि डोक्डो पर जापान के अनुचित दावों का दक्षिण कोरिया की संप्रभुता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही चेतावनी दी गई कि जापान की किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई का सियोल मजबूती से जवाब देगा।

दक्षिण कोरिया ने दोहराया कि ऐतिहासिक, भौगोलिक और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत डोक्डो उसका अभिन्न हिस्सा है और इस पर बार-बार किए जा रहे दावे सियोल और टोक्यो के बीच भविष्य उन्मुख संबंध बनाने में सहायक नहीं होंगे।

--आईएएनएस

डीएससी

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