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ट्रंप की आर्थिक रणनीति को झटका, कांग्रेस ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सराहना की

नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले की तारीफ की है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ज्यादातर बड़े टैरिफ को खत्म कर दिया गया।

नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले की तारीफ की है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ज्यादातर बड़े टैरिफ को खत्म कर दिया गया।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर पोस्ट कर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप की पूरी टैरिफ रणनीति को खारिज करने के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट को सलाम। इसकी आइडियोलॉजिकल बनावट को देखते हुए यह काफी कमाल का फैसला है। 6-3 का फैसला निर्णायक है।”

उन्होंने आगे कहा कि शुक्रवार को दिया गया यह फैसला ट्रंप के आर्थिक एजेंडे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

वहीं, ट्रंप के टैरिफ पर आए कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि जल्दबाजी शैतान का काम है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के तथाकथित ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है। अगर भारत ने सिर्फ 18 दिन और इंतजार किया होता तो शायद हम एकतरफा भारत-विरोधी ट्रेड डील में नहीं फंसते।

उन्होंने आगे लिखा कि मोदी ने 2 फरवरी को देर रात वाशिंगटन को वह कॉल क्यों किया? भारत ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक इंतजार करने की शुरुआती स्ट्रैटेजी क्यों छोड़ दी?

रूढ़िवादी नेतृत्व वाली अदालत ने एक दुर्लभ कदम उठाते हुए राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों के उपयोग को सीमित कर दिया। अदालत ने यह घोष‍ित क‍िया कि उनके पास 1977 के इमरजेंसी कानून के तहत भारत सहित अमेरिका के व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।

पोलिटिको ने 6-3 के फैसले को ट्रंप के इकोनॉमिक प्रोग्राम के एक मुख्य हिस्से की बड़ी अस्वीकृति बताया।

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की ओर से लिखते हुए राष्ट्रपति की शक्तियों की संवैधानिक सीमाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति असीमित मात्रा, अवधि और दायरे के टैरिफ एकतरफा लगाने की असाधारण शक्ति का दावा करते हैं। इस कथित अधिकार की व्यापकता, इतिहास और संवैधानिक संदर्भ को देखते हुए, उन्हें इसका प्रयोग करने के लिए स्पष्ट संसदीय अनुमति दिखानी होगी।”

उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप जिस 1977 के कानून पर भरोसा करते थे, वह जरूरी कांग्रेसनल अप्रूवल से 'कम' है।

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, न्यायाधीशों ने फैसला सुनाया कि प्रेसिडेंट के पास इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत राष्ट्रपति को इतने बड़े टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं था।

द हिल ने कहा कि टिप्पणी की कि अदालत ने “शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापक टैरिफ के अधिकांश हिस्से को खारिज कर दिया और यह निर्णय देते हुए कि वैश्विक व्यापार को पुनर्गठित करने के लिए आपातकालीन कानून का उनका उपयोग अवैध था, उनकी आर्थिक रणनीति के एक प्रमुख स्तंभ को समाप्त कर दिया।”

न्यायाधीशों ने प्रेसिडेंट के पास इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के ट्रंप के बड़े टैरिफ को खारिज कर दिया, जो राष्ट्रपति को “अजीब और असाधारण” खतरों वाली नेशनल इमरजेंसी के जवाब में इंपोर्ट को रेगुलेट करने की इजाजत देता है।

--आईएएनएस

अर्प‍ित/डीकेपी

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