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झारखंड: बीएयू के दीक्षांत समारोह में 387 विद्यार्थियों को डिग्री और 12 को स्वर्ण पदक


रांची, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के नौवें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को 387 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 335 स्नातक, 48 स्नातकोत्तर और चार पीएचडी उपाधियां शामिल हैं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। कुल 11 विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक और एक विद्यार्थी को कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।

रांची, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के नौवें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को 387 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 335 स्नातक, 48 स्नातकोत्तर और चार पीएचडी उपाधियां शामिल हैं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। कुल 11 विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक और एक विद्यार्थी को कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।

समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि कृषि अनुसंधान को किसानों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान की सफलता प्रयोगशाला में नहीं, बल्कि किसान के खेत में दिखाई देनी चाहिए। ऐसी तकनीक और पद्धतियां विकसित होनी चाहिए, जिनसे सीमित जमीन और संसाधनों में किसानों की आय बढ़े, उत्पादन लागत घटे तथा मिट्टी और जल का संरक्षण हो।

गंगवार ने कहा कि कृषि देश की अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, जल संकट, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और छोटे तथा सीमांत किसानों की समस्याओं के बीच कृषि क्षेत्र में विज्ञान और नवाचार की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, रिमोट सेंसिंग, सटीक कृषि और आधुनिक सिंचाई जैसी तकनीकों का इस्तेमाल तभी सार्थक होगा, जब वे किसानों के लिए व्यावहारिक और उपयोगी हों।

झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के पठारी इलाकों में बारिश का काफी पानी बह जाता है और कई क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा सीमित है। ऐसे में जल संरक्षण, वर्षाजल के बेहतर उपयोग, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसल विविधीकरण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

राज्यपाल ने कहा कि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय उन्नत फसल प्रभेदों, बीज और पौध सामग्री, किसानों के प्रशिक्षण, कृषि परामर्श और कृषि प्रसार के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय से शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के दायरे को और व्यापक बनाने की अपेक्षा की। उन्होंने युवाओं से कृषि को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित स्टार्टअप, खाद्य प्रसंस्करण, बागवानी, पशुपालन और मत्स्यपालन जैसे क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता की बड़ी संभावनाएं हैं। युवाओं को रोजगार तलाशने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए।

गंगवार ने कहा कि ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य में कृषि क्षेत्र की प्रगति और किसानों का कल्याण महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवा कृषि वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, उद्यमियों और विद्यार्थियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने छात्राओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां शिक्षा, विज्ञान, कृषि अनुसंधान और उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान को खेत तक, विज्ञान को किसान तक और नवाचार को समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की वास्तविक सार्थकता तभी है जब उसका लाभ समाज तक पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन पर भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीएससी

Date & Time : 2026-10-08 16:15:02

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