Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

जो सपना हिंदू समाज और धारवासियों ने देखा था, वह पूरा हो रहा है : याचिकाकर्ता आशीष गोयल


इंदौर, 15 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार में स्थित भोजशाला को मंदिर परिसर माना है। कोर्ट के इस फैसले से हिंदू पक्ष खुश हैं। न्यायालय के फैसले पर लोगों के रिएक्शन सामने आ रहे हैं।

इंदौर, 15 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार में स्थित भोजशाला को मंदिर परिसर माना है। कोर्ट के इस फैसले से हिंदू पक्ष खुश हैं। न्यायालय के फैसले पर लोगों के रिएक्शन सामने आ रहे हैं।

हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हिंदू समाज मां सरस्वती मंदिर भोजशाला की मुक्ति और उसकी गरिमा की पुनर्स्थापना के लिए 700 वर्षों से संघर्ष कर रहा था। 2003 के आंदोलन के बाद, भोजशाला में प्रवेश पर लगी पाबंदियां हटा दी गईं, लेकिन यह स्थल अभी भी पूरी तरह से हिंदुओं को नहीं सौंपा गया था।

आशीष गोयल ने कहा कि मई 2022 में उच्च न्यायालय में केस लगाया गया था। इस मामले में चार साल तक सुनवाई चलती रही। सभी पक्षों को माननीय न्यायालय ने सुना। 12 मई को न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा था। 15 मई का दिन हिंदू समाज के लिए ऐतिहासिक है। जो सपना हिंदू समाज और धारवासियों ने देखा था, वह पूरा हो रहा है।

आशीष गोयल ने कहा कि अब भोजशाला में हिंदुओं के प्रवेश पर किसी प्रकार की रोक नहीं रहेगी। हिंदू समाज का व्यक्ति हर दिन पूजा-हवन कर सकता है। कोर्ट के फैसले के बाद अब वहां पर नमाज बंद होगी। हमारी जितनी भी मांग थी, सभी को न्यायालय ने मानी है।

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह सत्य, न्याय और संविधान की जीत है। भोजशाला कभी संस्कृत का बड़ा ऐतिहासिक केंद्र हुआ करता था। इस फैसले से देश के सभी हिंदू और मुसलमान को खुश होना चाहिए। सच्चाई को ज्यादा दिन दबाया नहीं जा सकता।

भाजपा नेता आरपी सिंह ने कोर्ट के फैसले पर आईएएनएस से बातचीत में कहा कि न्यायालय ने तथ्यों के आधार पर अपना फैसला दिया है। एएसआई के ऐतिहासिक निष्कर्षों और रिकॉर्ड के अनुसार, वहां मूर्तियां मौजूद थीं, जिनमें वाग्देवी की एक मूर्ति भी शामिल थी, जिन्हें देवी सरस्वती का ही एक रूप माना जाता है। भोजशाला ज्ञान का मंदिर था। यहां संस्कृत पढ़ाई जाती थी। बाकी पक्षों से अपेक्षा है कि वे इस फैसले को मानेंगे।

--आईएएनएस

एसडी/एबीएम

Share:

Leave A Reviews

Related News