Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

कभी 'बेबी नाज' बनकर जीता था दिल, फिर बनीं श्रीदेवी की आवाज, ऐसा था कुमारी नाज का सफर


मुंबई, 19 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने पर्दे पर जितना काम किया, उससे कहीं ज्यादा अपनी प्रतिभा से लोगों के दिल में जगह बनाई। कुमारी नाज भी ऐसी ही कलाकार थीं। बचपन में उन्हें 'बेबी नाज' के नाम से पहचान मिली और उनकी मासूम अदाकारी ने दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया। आगे चलकर उन्होंने फिल्मों में बड़े किरदार किए, भोजपुरी सिनेमा में भी पहचान बनाई और जब अभिनय के मौके कम होने लगे तो उन्होंने अपनी आवाज को ही अपना हुनर बना लिया। इसी दौर में वह श्रीदेवी की शुरुआती हिंदी फिल्मों की आवाज बनीं।

मुंबई, 19 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने पर्दे पर जितना काम किया, उससे कहीं ज्यादा अपनी प्रतिभा से लोगों के दिल में जगह बनाई। कुमारी नाज भी ऐसी ही कलाकार थीं। बचपन में उन्हें 'बेबी नाज' के नाम से पहचान मिली और उनकी मासूम अदाकारी ने दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया। आगे चलकर उन्होंने फिल्मों में बड़े किरदार किए, भोजपुरी सिनेमा में भी पहचान बनाई और जब अभिनय के मौके कम होने लगे तो उन्होंने अपनी आवाज को ही अपना हुनर बना लिया। इसी दौर में वह श्रीदेवी की शुरुआती हिंदी फिल्मों की आवाज बनीं।

कुमारी नाज का असली नाम सलमा बेग था। उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता मिर्जा दाऊद बेग लेखक थे, लेकिन परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी। इसी वजह से नाज को बहुत छोटी उम्र में ही काम करना पड़ा। उन्होंने करीब चार साल की उम्र से काम शुरू कर दिया था। जिस उम्र में बच्चे खेलते और पढ़ते है, उस उम्र में नाज का समय कैमरे और शूटिंग के बीच बीतता था।

बाल कलाकार के रूप में नाज ने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन साल 1954 में आई 'बूट पॉलिश' ने उनकी किस्मत बदल दी। फिल्म में उन्होंने बेलू नाम की बच्ची का किरदार निभाया था। उनका अभिनय इतना असरदार था कि इस फिल्म ने उन्हें देश के साथ-साथ विदेश में भी पहचान दिलाई। 'बूट पॉलिश' को 1955 के कान फिल्म फेस्टिवल में प्रतियोगिता के लिए चुना गया था। कुमारी नाज को उनके अभिनय के लिए विशेष सम्मान भी मिला।

'बूट पॉलिश' के बाद बेबी नाज उस दौर की चर्चित बाल कलाकारों में शामिल हो गईं। उन्होंने 'देवदास', 'मुसाफिर', 'लाजवंती', 'दो फूल' और 'कागज के फूल' जैसी फिल्मों में भी काम किया। जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ी, उन्होंने बड़े किरदार निभाने शुरू किए और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई।

बड़े होने के बाद हिंदी फिल्मों में उन्हें कई सहायक भूमिकाएं मिलीं। साल 1970 की 'सच्चा झूठा' में उन्होंने राजेश खन्ना की बहन का किरदार निभाया। इसके अलावा, वह 'बहू बेगम', 'कटी पतंग' और 'हाथी मेरे साथी' जैसी फिल्मों में भी नजर आईं। लेकिन उनके करियर की एक मुश्किल यह रही कि दर्शकों के मन में बनी 'बेबी नाज' की छवि से बाहर निकलना उनके लिए आसान नहीं था।

इसी बीच उन्होंने भोजपुरी सिनेमा का रुख किया। साल 1963 में आई 'बिदेसिया' से उन्हें भोजपुरी फिल्मों में भी बड़ी पहचान मिली। इसके बाद 'सैंया से नेहा लगाइबे' और 'अईल बसंत बहार' जैसी फिल्मों में उन्होंने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। इस दौर में वह भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं।

लेकिन कुमारी नाज के करियर का सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब फिल्मों में अभिनय के मौके धीरे-धीरे कम होने लगे। उन्होंने डबिंग आर्टिस्ट के तौर पर काम शुरू किया। इसी दौरान उनकी आवाज श्रीदेवी से जुड़ी। श्रीदेवी जब हिंदी फिल्मों में अपनी पहचान बना रही थीं, उस समय कुमारी नाज ने उनकी शुरुआती हिंदी फिल्मों के लिए आवाज दी। कई रिपोर्ट्स में खास तौर पर 'हिम्मतवाला', 'मवाली' और 'तोहफा' का जिक्र है। पर्दे पर श्रीदेवी नजर आती थीं, लेकिन उनकी आवाज के पीछे कुमारी नाज की मेहनत होती थी।

निजी जिंदगी में कुमारी नाज ने अभिनेता सुबीराज से शादी की। दोनों ने साथ में काम भी किया था। उनके रिश्ते की शुरुआत फिल्म 'देखा प्यार तुम्हारा' के दौरान हुई थी। बाद में दोनों ने शादी कर ली और उनके दो बच्चे हुए। सुबीराज कपूर परिवार से जुड़े थे।

कुमारी नाज का निधन 19 अक्टूबर 1995 को 51 साल की उम्र में हुआ। उनके निधन की वजह गंभीर लिवर की बीमारी बताई जाती है।

--आईएएनएस

पीके/एएस

Share:

Leave A Reviews

Related News