
इंदौर में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी द्वारा सुभाष नगर से पाटनीपुरा चौराहे तक निकाली गई ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब एक प्रदर्शनकारी पोस्टर लेकर मंच के करीब पहुंच गया। कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी प्रहलाद पांडे हाथ में एक विवादास्पद पोस्टर थामे नजर आए। उन्हें देखते ही मंच पर मौजूद मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बुरी तरह भड़क गए। विजयवर्गीय ने मंच से ही बेहद तल्ख लहजे में कहा, "साला इतने जूते खाने के बाद भी आ गया।" इसके तुरंत बाद मंत्री ने मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश देकर पांडे को तत्काल वहां से हटाने और हिरासत में लेने को कहा।
समाजसेवी प्रहलाद पांडे जिस पोस्टर को लहरा रहे थे, उस पर सीधे नगर निगम और व्यवस्था पर तंज कसते हुए लिखा था— ‘30 हजार का बल्ब और 33 हजार लीटर फिनाइल’। यह पोस्टर इंदौर नगर निगम के कथित घोटालों और फिजूलखर्ची की ओर इशारा कर रहा था। जैसे ही रैली में यह पोस्टर लहराया गया, भाजपा कार्यकर्ताओं और मंच पर मौजूद नेताओं का ध्यान उस ओर गया। मंत्री के सख्त रुख और निर्देश के बाद पुलिस कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए प्रहलाद पांडे को पोस्टर सहित अपनी कस्टडी में ले लिया और कार्यक्रम स्थल से दूर ले जाकर हिरासत में बैठा लिया।
उल्लेखनीय है कि प्रहलाद पांडे और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच विवाद का यह कोई पहला वाकया नहीं है। इससे पहले भी प्रहलाद पांडे ने विभिन्न नागरिक मुद्दों और नगर निगम के मामलों को लेकर कैलाश विजयवर्गीय के निजी आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी विवाद बढ़ने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। हालांकि, उस समय स्वयं कैलाश विजयवर्गीय ने हस्तक्षेप करते हुए पांडे को छुड़वाने के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखा था। लेकिन पदयात्रा के मंच के ठीक सामने दोबारा उन्हीं की मौजूदगी और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े पोस्टर को देखकर मंत्री अपना आपा खो बैठे और उन्होंने सार्वजनिक मंच से तीखे शब्दों का इस्तेमाल कर डाला।
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