
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने जेलों में बंद विचाराधीन बंदियों और कैदियों की लंबित जमानत अर्जियों के त्वरित निस्तारण के लिए एक ऐतिहासिक प्रशासनिक पहल की है। उच्च न्यायालय प्रशासन द्वारा 7 विशेष पीठों (स्पेशल बेंच) का गठन किया गया है, जो 29 अक्टूबर से प्रारंभ होकर आगामी 6 नवंबर तक प्रभावी रहेंगी। इस विशेष व्यवस्था के अंतर्गत नियमित न्यायिक समय के पश्चात प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे से विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि नियमित मुकदमों की सुनवाई प्रभावित किए बिना केवल जमानत प्रकरणों का तेजी से निपटारा किया जा सके।
इस विशेष दायित्व के निर्वहन हेतु उच्च न्यायालय प्रशासन द्वारा जस्टिस विवेक रूसिया, जस्टिस आनंद पाठक, जस्टिस विशाल मिश्रा, जस्टिस दीपक खोट, जस्टिस रामकुमार चौबे और जस्टिस बी.पी. शर्मा सहित वरिष्ठ न्यायाधीशों को नामित किया गया है। निर्धारित तिथियों के मध्य जिन वकीलों और पक्षकारों की जमानत याचिकाएं पूर्व से सूचीबद्ध या लंबित हैं, उन्हें दोपहर के विशेष सत्र में अपनी दलीलें प्रस्तुत करने का अतिरिक्त अवसर मिल रहा है। त्योहारी सीजन के दौरान वर्षों और महीनों से फैसले की प्रतीक्षा कर रहे बंदियों व उनके परिजनों के लिए यह कदम एक बड़ी मानवीय और कानूनी राहत बनकर सामने आया है।
वर्तमान में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर मुख्य पीठ समेत इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में 3 लाख से अधिक विभिन्न याचिकाएं व मुकदमे लंबित हैं। न्यायालय में न्यायाधीशों के कुल 53 पद स्वीकृत हैं, जिनके विरुद्ध अभी महज 38 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं, जबकि 6 नवंबर को जस्टिस पी.के. अग्रवाल सेवानिवृत्त होने वाले हैं। जजों की भारी कमी और मुकदमों के अत्यधिक दबाव के बावजूद अतिरिक्त समय निकालकर मामलों का निपटारा करने का यह मॉडल न्यायिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे पहले ग्वालियर खंडपीठ में भी मुख्य न्यायाधीश की एकल पीठ ने स्वयं अतिरिक्त समय देकर प्रकरणों को निपटाने की मिसाल पेश की थी, जिसे अब व्यापक स्तर पर लागू किया गया है।
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