
बालाघाट जिले की सीमा से लगे विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व के खापा वन परिक्षेत्र में गुरुवार दोपहर बाघ के हमले की एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। जंगल में छिंद (झाड़ू बनाने की पत्तियां) और अन्य वनोपज एकत्रित करने गई 48 वर्षीय महिला सुनीता बाई पर अचानक एक बाघ ने हमला कर दिया। बाघ के पंजों के वार से महिला के दोनों हाथों, कमर और पैरों में गहरे घाव आए हैं। अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के समय सुनीता बाई के साथ गांव के अन्य लोग भी जंगल में मौजूद थे। जैसे ही बाघ ने महिला पर झपट्टा मारा, आसपास मौजूद ग्रामीणों ने बिना हिम्मत हारे एकजुट होकर जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के भारी शोर और ललकार के बाद बाघ महिला को छोड़कर घने जंगल की ओर भाग निकला। इसके बाद साथी ग्रामीण लहूलुहान अवस्था में सुनीता बाई को किसी तरह मुख्य सड़क तक लेकर आए और परिजनों को सूचना दी। परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैहर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका प्राथमिक उपचार जारी है।
कान्हा टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र अधिकारी गनवीर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही वन अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति का मुआयना किया। उन्होंने बताया कि वन विभाग वन्यजीवों और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए लगातार गश्त और निगरानी कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त क्षेत्र प्रतिबंधित वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां वन्यजीवों की सघन मौजूदगी के कारण ग्रामीणों का प्रवेश वर्जित है, लेकिन महिला वहां चली गई थी।
कान्हा के सीमावर्ती वन क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव द्वंद्व की बढ़ती घटनाओं से आसपास के गांवों में भारी दहशत का माहौल है। जानकारी के अनुसार, इसी क्षेत्र में बीते ढाई महीनों के भीतर बाघ के हमले की यह तीसरी बड़ी घटना है। इससे पहले 2 अगस्त को सुगनी बाई और 7 अगस्त को राजकुमार नाम के ग्रामीण पर भी बाघ हमला कर उन्हें घायल कर चुका है। लगातार हो रही घटनाओं को लेकर ग्रामीणों ने वन विभाग से सीमावर्ती बस्तियों के पास फेंसिंग और गश्त बढ़ाने की मांग की है, ताकि आबादी वाले इलाकों में हिंसक वन्यजीवों की आमद रोकी जा सके।
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