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कटनी: गेहूं उपार्जन केंद्र पर अवैध वसूली का खेल, पोर्टल एंट्री के नाम पर महिला किसान से मांगे पैसे, वीडियो वायरल


कटनी जिले से किसानों के शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है। जिले के पड़ारिया गेहूं उपार्जन केंद्र पर किसानों से उपज की पोर्टल एंट्री करने के एवज में खुलेआम 'सुविधा शुल्क' की मांग की जा रही है। ताज़ा मामला एक महिला किसान से जुड़ा है, जिसके बाद खरीदी केंद्रों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

महिला किसान से 'एंट्री' के बदले मांगे 810 रुपये

जानकारी के अनुसार, ग्राम देवराखुर्द की निवासी महिला किसान कलावती द्विवेदी अपनी उपज बेचने पड़ारिया केंद्र पहुंची थीं। यहाँ उनके लगभग 30 क्विंटल गेहूं की तुलाई का कार्य संपन्न हुआ। आरोप है कि तुलाई के बाद जब डेटा को सरकारी पोर्टल पर दर्ज करने की बारी आई, तो वहां तैनात कर्मचारी ने काम के बदले 810 रुपये की अवैध मांग की। पीड़ित किसान के पक्ष का कहना है कि बिना पैसे दिए पोर्टल पर रसीद जनरेट करने में आनाकानी की जा रही थी।

वीडियो ने खोली व्यवस्था की पोल

इस अवैध वसूली का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर पैसे के लेन-देन की बात की जा रही है। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद जिला प्रशासन और खाद्य विभाग में हड़कंप मच गया है। पड़ारिया केंद्र में गेहूं खरीदी की जिम्मेदारी प्रियदर्शनी विपणन समिति के पास है। स्थानीय किसानों का आरोप है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि केंद्र पर बिना अतिरिक्त पैसे दिए काम कराना बेहद मुश्किल हो गया है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों की उड़ रही धज्जियाँ

गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण कर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि किसानों को किसी भी स्तर पर परेशानी नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि खरीदी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए। इसके बावजूद, कटनी में सामने आया यह भ्रष्टाचार का मामला सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर कर रहा है।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

घटना के बाद क्षेत्रीय किसानों में भारी रोष व्याप्त है। किसानों ने जिला कलेक्टर और संबंधित विभाग से मांग की है कि वायरल वीडियो के आधार पर जांच कर दोषी कर्मचारियों और समिति के प्रबंधकों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो मेहनत की कमाई बिचौलियों और भ्रष्ट कर्मचारियों की भेंट चढ़ती रहेगी।

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