कटनी, प्राचार्य पर छेड़छाड़ के आरोप, SP कार्यालय पहुंची पीड़िता

कटनी। जिले के रीठी स्थित शासकीय संदीपनी स्कूल के प्राचार्य हेमराज कारपेंटर पर एक महिला सफाई कर्मचारी ने छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं। आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में कार्यरत महिला ने एसपी कार्यालय पहुंचकर प्राचार्य पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने की लिखित शिकायत की है। मामले की पुलिस जांच शुरू हो चुकी है।
पीड़िता के आरोप
पीड़िता का आरोप है कि प्राचार्य हेमराज कारपेंटर लगातार उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाल रहे थे। जब उसने इस मांग को मना किया, तो प्राचार्य ने उसे नौकरी से निकालने की धमकी देना शुरू कर दिया। महिला ने अपनी जीविका छिनने का डर जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
थाने में नहीं हुई सुनवाई, SP तक पहुंची पीड़िता
पीड़िता ने बताया कि उसने सबसे पहले रीठी थाने में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया था, लेकिन वहां कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता को देखते हुए वह मजबूरन जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंची। यह एक गंभीर सवाल उठाता है कि क्या स्थानीय थानों में महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता?
प्राचार्य ने आरोपों को बताया साजिश
वहीं प्राचार्य हेमराज कारपेंटर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और झूठा करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ राजनीतिक लोग पिछले एक वर्ष से उन्हें परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं और यह शिकायत उन्हीं की साजिश का हिस्सा है।
प्राचार्य ने प्रशासन से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की अपील की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनका कहना है कि यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो वे किसी भी सजा के लिए तैयार हैं, लेकिन यदि आरोप झूठे निकले तो झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस जांच जारी
महिला कर्मचारी की शिकायत के बाद एसपी कार्यालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब:
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स्कूल के अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज कर रही है
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तकनीकी साक्ष्यों की मदद से मामले की जांच कर रही है
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रीठी थाने की निष्क्रियता की भी जांच करेगी
पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही यह तय हो पाएगा कि आरोप सच हैं या साजिश। फिलहाल, प्राचार्य को निलंबित नहीं किया गया है, लेकिन उन्हें जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
बड़े सवाल
यह मामला कई गंभीर सवाल उठाता है:
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क्या आउटसोर्स कर्मचारियों को सुरक्षित कार्यस्थल मिल रहा है?
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क्या स्थानीय थाने महिलाओं की शिकायतों को दबा रहे हैं?
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क्या शासकीय स्कूलों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर्याप्त है?
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क्या शिक्षक और प्राचार्य जैसे पदों पर बैठे लोग अपने पद का दुरुपयोग** कर रहे हैं?
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