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'खलनायक' से छाईं इला अरुण, गायकी ही नहीं अभिनय में भी कमाल

मुंबई, 14 मार्च (आईएएनएस)। फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई सितारे हैं, जो एक ही क्षेत्र में नहीं बल्कि कई क्षेत्रों में सफलता हासिल कर चुके हैं। ऐसी ही एक बहुमुखी प्रतिभा की धनी कलाकार हैं इला अरुण। राजस्थानी लोक संगीत से बॉलीवुड तक का सफर तय करने वाली इला न सिर्फ अभिनेत्री, बल्कि कमाल की गायिका भी हैं।

मुंबई, 14 मार्च (आईएएनएस)। फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई सितारे हैं, जो एक ही क्षेत्र में नहीं बल्कि कई क्षेत्रों में सफलता हासिल कर चुके हैं। ऐसी ही एक बहुमुखी प्रतिभा की धनी कलाकार हैं इला अरुण। राजस्थानी लोक संगीत से बॉलीवुड तक का सफर तय करने वाली इला न सिर्फ अभिनेत्री, बल्कि कमाल की गायिका भी हैं।

15 मार्च 1954 को जोधपुर, राजस्थान में जन्मीं इला अरुण ने अपनी अनोखी आवाज और बोल्ड गीतों से 90 के दशक में धूम मचाई। उनका सबसे चर्चित गाना साल 1993 में आई फिल्म 'खलनायक' का 'चोली के पीछे क्या है', जो आज भी लोगों की जुबान पर है। इस गाने को उन्होंने अल्का याग्निक के साथ गाया था और माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया था। इस गाने के लिए इला अरुण को फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। हालांकि, ये गाना विवादों के घेरे में रहा।

'चोली के पीछे क्या है' गाने के बोलों को अश्लील बताया गया, और इला अरुण से सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसे न गाने की मांग भी की गई। यहां तक कि दूरदर्शन ने भी इस गाने पर बैन लगा दिया था, लेकिन इला अरुण ने हमेशा कहा कि उनके गाने अश्लील नहीं हैं, बल्कि वह लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की सच्चाई को दिखाते हैं। विवाद के बावजूद यह गाना सुपरहिट रहा और आज भी शादियों-महफिलों में बजता है।

इला अरुण ने सिर्फ गायकी ही नहीं, बल्कि अभिनय में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। 'करण अर्जुन' में 'गुप चुप गुप चुप', 'हम आपके हैं कौन' में 'मोरनी बागा मा बोले' (लता मंगेशकर के साथ), और 'स्लमडॉग मिलियनेयर' में 'रिंगा रिंगा' जैसे गाने उनके करियर के बड़े हाइलाइट्स हैं। इसके अलावा, उन्होंने तमिल और तेलुगू फिल्मों के गानों को भी अपनी आवाज दी है।

गायकी में सफल इला अभिनय के क्षेत्र में भी आगे हैं। उन्होंने कई यादगार किरदार निभाए हैं, जिन्हें दर्शकों का खूब प्यार मिला। साल 2008 में आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी फिल्म 'जोधा अकबर' में उनकी भूमिका काफी चर्चित रही। फिल्म में वह अकबर की पालक मां 'महाम अंगा' की दमदार भूमिका में नजर आईं। इसके अलावा, 'चाइना गेट', 'चिंगारी', 'वेल डन अब्बा', 'वेलकम टू सज्जनपुर' और 'बेगम जान' जैसी फिल्मों में उन्होंने सहायक भूमिकाओं में कमाल दिखाया। ज्यादातर उन्होंने साइड रोल्स किए, लेकिन हर किरदार में अपनी मौजूदगी से फिल्म को मजबूती मिली।

एक्टिंग और सिंगिंग के साथ ही टीवी की दुनिया में भी इला अरुण का करियर बेहतरीन रहा। साल 1980 के दशक से शुरू हुआ सफर सफल रहा। उन्होंने 'भारत एक खोज', 'यात्रा' और 'संविधान' (भारत के संविधान निर्माण पर आधारित मिनी-सीरीज) जैसे टीवी शोज में भी काम किया। टीवी से उन्हें शुरुआती पहचान मिली, जिसके बाद वह फिल्मों में आईं।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

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